Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने भ्रष्टाचार के एक पुराने मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने 300 रुपये की रिश्वत लेने के दोषी हेड कांस्टेबल सुमेर सिंह की एक साल की सजा को बरकरार रखा है। यह मामला करीब 25 साल पुराना है, जिस
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने भ्रष्टाचार के एक पुराने मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने 300 रुपये की रिश्वत लेने के दोषी हेड कांस्टेबल सुमेर सिंह की एक साल की सजा को बरकरार रखा है। यह मामला करीब 25 साल पुराना है, जिसमें कोर्ट ने भ्रष्टाचार पर कड़ा रुख अपनाया है।
क्या था पूरा मामला और कैसे पकड़े गए पुलिसकर्मी
यह मामला अप्रैल 1999 का है। हेड कांस्टेबल सुमेर सिंह उस समय पटेल नगर पुलिस स्टेशन में तैनात थे। उन पर आरोप था कि उन्होंने एक व्यक्ति से उसकी चोरी हुई मोटरसाइकिल की मूल आरसी (RC) वापस करने के बदले 300 रुपये की रिश्वत मांगी थी। 3 अप्रैल 2000 को भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) ने जाल बिछाया और सुमेर सिंह को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया था।
अदालत ने सजा बरकरार रखते हुए क्या कहा
न्यायमूर्ति चंद्रशेखरन सुधा ने सुमेर सिंह की बेगुनाही की दलीलों को खारिज कर दिया। अदालत ने माना कि भले ही सिर्फ पैसे मिलना रिश्वत साबित करने के लिए काफी न हो, लेकिन इस मामले की परिस्थितियों से साफ है कि अवैध लाभ की मांग की गई थी। कोर्ट ने कहा कि बाइक की बरामदगी से लेकर दूषित नोटों तक की पूरी कड़ी आरोपी के अपराध को साबित करती है।
मामले से जुड़ी जरूरी जानकारियां
| विवरण |
जानकारी |
| दोषी का नाम |
हेड कांस्टेबल सुमेर सिंह |
| रिश्वत की राशि |
300 रुपये |
| थाना |
पटेल नगर, दिल्ली |
| सजा |
एक साल की कैद |
| कानूनी धाराएं |
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7, 13(1)(d) और 13(2) |
| निचली अदालत का फैसला |
अक्टूबर 2006 |