Delhi: Shark Tank India के जज और boAt Lifestyle के को-फाउंडर Aman Gupta को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने कई संस्थाओं को आदेश दिया है कि वे गुप्ता की आवाज, फोटो, ट्रेडमार्क और उनकी पहचान का गलत इस्तेमाल न
Delhi: Shark Tank India के जज और boAt Lifestyle के को-फाउंडर Aman Gupta को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने कई संस्थाओं को आदेश दिया है कि वे गुप्ता की आवाज, फोटो, ट्रेडमार्क और उनकी पहचान का गलत इस्तेमाल न करें। जस्टिस तुषार राव गेडेला ने इस मामले में अंतरिम आदेश जारी किया है ताकि उनकी पहचान का व्यावसायिक दुरुपयोग रोका जा सके।
अमन गुप्ता की पहचान का कैसे हो रहा था गलत इस्तेमाल?
अदालत में यह बात सामने आई कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अमन गुप्ता की पहचान का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हो रहा था। कई लोग बिना अनुमति के उनके नाम से मर्चेंडाइज बेच रहे थे और फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट चला रहे थे। सबसे गंभीर बात यह रही कि AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के जरिए उनके डीपफेक वीडियो और आपत्तिजनक कंटेंट भी बनाए जा रहे थे, जिस पर कोर्ट ने तुरंत दखल देना जरूरी समझा।
कोर्ट ने इस मामले में क्या आदेश दिया है?
जस्टिस तुषार राव गेडेला ने साफ किया कि किसी भी व्यक्ति की पहचान उसकी प्राइवेसी और गरिमा का हिस्सा है, जिसे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत सुरक्षा मिली हुई है। कोर्ट ने आदेश दिया कि बिना सहमति के किसी की पहचान का व्यावसायिक इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। हालांकि, गूगल की दलील पर कोर्ट ने यह भी कहा कि हर एक पोस्ट को हटाना जरूरी नहीं है, जैसे कि सामान्य मीम्स या बिना नुकसान पहुँचाने वाला कंटेंट हटाया जाना अनिवार्य नहीं होगा।
केस में कौन-कौन शामिल है और क्या है कानूनी पक्ष?
अमन गुप्ता की तरफ से सीनियर एडवोकेट दिया कपूर और एडवोकेट नकुल गांधी ने पैरवी की। इस केस में कई अज्ञात संस्थाओं (John Doe), सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और ई-कॉमर्स कंपनियों को प्रतिवादी बनाया गया है। याचिका में कहा गया कि इस तरह के गलत इस्तेमाल से अमन गुप्ता की साख और व्यापार को भारी नुकसान पहुँच रहा है। यह मामला AI और डीपफेक के दौर में सेलिब्रिटी अधिकारों की सुरक्षा के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
पर्सनालिटी राइट्स (Personality Rights) क्या होते हैं?
इसका मतलब है कि किसी व्यक्ति की आवाज, चेहरा, नाम और पहचान उसकी अपनी संपत्ति है। कोई भी दूसरा व्यक्ति या कंपनी बिना उसकी इजाजत के इनका इस्तेमाल पैसे कमाने या विज्ञापन के लिए नहीं कर सकता।
अदालत ने AI कंटेंट और मीम्स पर क्या कहा?
कोर्ट ने AI से बने डीपफेक और आपत्तिजनक कंटेंट को हटाने का आदेश दिया है, लेकिन सामान्य मीम्स या ऐसे कंटेंट जिन्हें नुकसानदेह नहीं माना गया, उन्हें हटाने की अनिवार्यता नहीं जताई है।