Delhi: मनी लॉन्ड्रिंग आरोपी जवाद अहमद सिद्दीकी को पत्नी से मिलने के लिए मिली 3 दिन की पैरोल, अंतरिम जमानत याचिका खारिज

Delhi: मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर मामले में फंसे अल-फलाह यूनिवर्सिटी और अल-फलाह ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को दिल्ली हाईकोर्ट से थोड़ी राहत मिली है। अदालत ने उन्हें उनकी कैंसर पीड़ित पत्नी से मिलने के लिए तीन दिन क

Delhi: मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर मामले में फंसे अल-फलाह यूनिवर्सिटी और अल-फलाह ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को दिल्ली हाईकोर्ट से थोड़ी राहत मिली है। अदालत ने उन्हें उनकी कैंसर पीड़ित पत्नी से मिलने के लिए तीन दिन की कस्टडी पैरोल मंजूर की है, लेकिन छह हफ्ते की अंतरिम जमानत की मांग को पूरी तरह खारिज कर दिया है।

दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस सौरभ बनर्जी ने 13 जुलाई 2026 को यह आदेश दिया। कोर्ट ने तय किया कि सिद्दीकी 21, 23 और 25 जुलाई 2026 को सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे के बीच अपनी पत्नी उस्मा अख्तर से मिल सकेंगे। सिद्दीकी की पत्नी स्टेज-4 डिम्बग्रंथि (ovarian) कैंसर से जूझ रही हैं, जिसके आधार पर उनके वकील विक्रम चौधरी ने मानवीय आधार पर जमानत की अपील की थी और जीपीएस ट्रैकर बैंड पहनने की पेशकश भी की थी।

हालांकि, कोर्ट ने जमानत देने से इनकार करते हुए कहा कि मानवीय संवेदनाएं अपनी जगह हैं, लेकिन कानून के नियमों को केवल इस आधार पर कम नहीं किया जा सकता। अदालत को डर है कि जमानत मिलने पर सिद्दीकी सबूतों से छेड़छाड़ कर सकते हैं या भागने की कोशिश कर सकते हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी जमानत का कड़ा विरोध किया और बताया कि सिद्दीकी इस पूरे घोटाले के मुख्य साजिशकर्ता हैं।

ईडी के मुताबिक, अल-फलाह यूनिवर्सिटी और उससे जुड़ी संस्थाओं ने 2018 से 2025 के बीच करीब 415.10 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की है। इससे पहले साकेत की विशेष अदालत ने भी 9 जून 2026 को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। अब हाईकोर्ट ने उन्हें ‘उच्च जोखिम वाला कैदी’ मानते हुए जेल अधीक्षक को कड़ी सुरक्षा के साथ पैरोल पर भेजने का निर्देश दिया है। पैरोल के दौरान उन्हें किसी अन्य व्यक्ति से मिलने या बात करने की अनुमति नहीं होगी।