Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने सास-ससुर की हत्या की साजिश रचने के आरोप में जेल में बंद एक महिला को नियमित जमानत दे दी है। कोर्ट ने माना कि ट्रायल खत्म होने में अभी काफी समय लगेगा और ऐसी स्थिति में महिला का तीन साल से ज्
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने सास-ससुर की हत्या की साजिश रचने के आरोप में जेल में बंद एक महिला को नियमित जमानत दे दी है। कोर्ट ने माना कि ट्रायल खत्म होने में अभी काफी समय लगेगा और ऐसी स्थिति में महिला का तीन साल से ज्यादा समय तक जेल में रहना सही नहीं है। यह मामला साल 2023 का है जिसमें महिला पर अपने ही परिवार के सदस्यों की हत्या की साजिश का आरोप लगा था।
कोर्ट ने जमानत देने के लिए क्या कारण बताए?
जस्टिस अनुप जयराम भाम्भानी ने सुनवाई के दौरान कहा कि इस केस का ट्रायल लंबा खिंच सकता है। कोर्ट ने पाया कि अब तक कुल 57 गवाहों में से सिर्फ 16 गवाहों के बयान ही दर्ज हुए हैं। कोर्ट के मुताबिक, बिना किसी ठोस सबूत के सिर्फ आरोपी के बयान के आधार पर उसे लंबे समय तक बंद रखना उचित नहीं है।
केस की मुख्य बातें और पुलिस की जांच
यह मामला उत्तर-पूर्वी दिल्ली के गोकुल पुरी पुलिस स्टेशन में दर्ज हुआ था। पुलिस ने आरोप लगाया था कि महिला ने सह-आरोपियों विराज उर्फ विकास और आशीष भार्गव को घर के पिछले दरवाजे से अंदर आने दिया था। हालांकि, कोर्ट ने पाया कि पुलिस के पास इस दावे को साबित करने के लिए आरोपी के बयान के अलावा कोई दूसरा सबूत नहीं है। कॉल डिटेल रिकॉर्ड और लोकेशन डेटा की जांच ट्रायल के दौरान की जाएगी।
कौन थे इस केस के मुख्य लोग?
- मृतक: राधे श्याम और बीना रानी (महिला के सास-ससुर)
- मुख्य आरोपी: साजिश रचने का आरोप झेल रही महिला
- सह-आरोपी: विराज उर्फ विकास और आशीष भार्गव
- वकील: याचिकाकर्ता की तरफ से दीपांशु चोइथानी और माधव नागपाल पेश हुए
Frequently Asked Questions (FAQs)
दिल्ली हाई कोर्ट ने महिला को जमानत क्यों दी?
कोर्ट ने देखा कि ट्रायल की रफ्तार बहुत धीमी है और 57 में से केवल 16 गवाहों की जांच हुई है। महिला पिछले 3 साल से जेल में थी, जिसे कोर्ट ने बिना ठोस सबूत के और ज्यादा बढ़ाना सही नहीं माना।
यह मामला कहां का है और कब हुआ था?
यह मामला साल 2023 का है, जिसकी FIR उत्तर-पूर्वी दिल्ली के गोकुल पुरी पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई थी। इसमें सास-ससुर की हत्या की साजिश का आरोप था।