Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए HIV-AIDS से जूझ रहे एक आरोपी को जमानत दे दी है। कोर्ट ने साफ कहा कि आरोपी को जिस स्तर के इलाज और देखभाल की जरूरत है, वह जेल के माहौल में मिलना मुश्किल है। जस्टिस
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए HIV-AIDS से जूझ रहे एक आरोपी को जमानत दे दी है। कोर्ट ने साफ कहा कि आरोपी को जिस स्तर के इलाज और देखभाल की जरूरत है, वह जेल के माहौल में मिलना मुश्किल है। जस्टिस सौरभ बनर्जी ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए मरीज के स्वास्थ्य और सम्मानजनक जीवन जीने के अधिकार पर जोर दिया।
कोर्ट ने जमानत देने के लिए क्या कारण बताए?
जस्टिस सौरभ बनर्जी ने कहा कि HIV-AIDS से पीड़ित व्यक्ति के तौर पर आरोपी को खुली हवा में सांस लेने और एक सुरक्षित माहौल में उचित इलाज पाने का पूरा अधिकार है। कोर्ट ने जेल अधिकारियों द्वारा दाखिल मेडिकल रिपोर्ट का अध्ययन किया, जिसमें पुष्टि हुई कि आरोपी गंभीर और पुरानी बीमारियों से जूझ रहा है। उसे लगातार निगरानी और दवाओं की जरूरत है, जो जेल की भीड़भाड़ वाली स्थिति में संभव नहीं था।
आरोपी पर क्या आरोप थे और मामला क्या था?
यह मामला साल 2025 में दर्ज एक ड्रग्स केस से जुड़ा है, जिसमें NDPS एक्ट के तहत कार्रवाई की गई थी। आरोपी की स्कूटी पर सवार दो लोगों से 21 किलो गांजा बरामद हुआ था। हालांकि, कोर्ट ने यह जमानत केवल मानवीय आधार और स्वास्थ्य कारणों से दी है और केस की मेरिट या अन्य कानूनी पहलुओं पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
दिल्ली हाई कोर्ट ने मरीज को जमानत क्यों दी?
कोर्ट ने मानवीय आधार पर जमानत दी क्योंकि आरोपी HIV-AIDS से पीड़ित है और उसे ऐसी देखभाल की जरूरत है जो जेल के ओवरबर्डन माहौल में मिलना संभव नहीं था।
यह मामला किस अपराध से जुड़ा था?
यह मामला 2025 में दर्ज NDPS एक्ट के तहत ड्रग्स केस से जुड़ा है, जिसमें आरोपी की स्कूटी से 21 किलो गांजा बरामद किया गया था।