Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने नकली कैंसर की दवाएं बेचने और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में कई आरोपियों को जमानत दे दी है। जस्टिस गिरीश कथपालिया ने 4 मई 2026 को यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने इस मामले में जांच की कमियों और केस के दौर
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने नकली कैंसर की दवाएं बेचने और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में कई आरोपियों को जमानत दे दी है। जस्टिस गिरीश कथपालिया ने 4 मई 2026 को यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने इस मामले में जांच की कमियों और केस के दौरान मीडिया द्वारा की गई रिपोर्टिंग पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
कोर्ट ने जमानत देते समय किन बातों पर गौर किया?
कोर्ट ने इस मामले की जांच Prevention of Money Laundering Act (PMLA) के तहत की। जस्टिस कथपालिया ने PMLA की धारा 45 की दो कठिन शर्तों को देखा, जिसमें यह तय करना होता है कि आरोपी दोषी नहीं है और बाहर आने के बाद दोबारा अपराध नहीं करेगा। कोर्ट ने कुछ जमानत आवेदनों में धारा 50 के तहत दर्ज बयानों के आधार पर दिए गए तर्कों को खारिज कर दिया और केस की मेरिट के आधार पर जमानत मंजूर की।
मीडिया रिपोर्टिंग पर कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने इस बात पर चिंता जताई कि जब केस चल रहा था, तब कुछ मीडिया संस्थानों ने ऐसी खबरें छापीं जो कोर्ट में पूछे गए सवालों जैसी लग रही थीं। साथ ही, बिना किसी काट-छाँट के WhatsApp चैट भी सार्वजनिक कर दी गई थीं। कोर्ट ने साफ कहा कि न्यायिक कार्यवाही को प्रभावित करने की कोशिश करना न्यायपालिका की आजादी पर हमला है, हालांकि ठोस सबूत न होने के कारण कोर्ट ने इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया।
मामले की शुरुआत और जांच एजेंसियां
इस पूरे मामले की शुरुआत मार्च 2024 में दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की जांच से हुई थी। पुलिस ने नकली कैंसर की दवाएं बनाने और बेचने वाले एक सिंडिकेट का पर्दाफाश किया था। इसके बाद Enforcement Directorate (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग की कार्रवाई शुरू की और आरोप लगाया कि नकली दवाओं की बिक्री से अपराध की कमाई (proceeds of crime) की गई है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
नकली कैंसर दवा मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया?
कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसे कई आरोपियों को जमानत दे दी है और जांच प्रक्रिया में हुई कमियों के साथ-साथ मीडिया के हस्तक्षेप पर चिंता जताई है।
इस केस की जांच किन एजेंसियों ने की थी?
इस मामले की शुरुआती जांच मार्च 2024 में दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने की थी, जिसके बाद ED ने PMLA के तहत मनी लॉन्ड्रिंग की कार्रवाई शुरू की।