Delhi: केंद्र सरकार की नौकरियों में EWS (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) के उम्मीदवारों को मिलने वाली सुविधाओं को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि सिर्फ आर्थिक आधार पर उम्मीदवारों को
Delhi: केंद्र सरकार की नौकरियों में EWS (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) के उम्मीदवारों को मिलने वाली सुविधाओं को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि सिर्फ आर्थिक आधार पर उम्मीदवारों को उम्र सीमा या परीक्षा देने के प्रयासों में अलग से छूट नहीं दी जा सकती। यह फैसला उन अभ्यर्थियों के लिए बड़ा झटका है जो अन्य आरक्षित श्रेणियों की तरह अतिरिक्त रियायतें चाहते थे।
EWS उम्मीदवारों को अतिरिक्त छूट क्यों नहीं मिलेगी?
दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार, 16 अप्रैल 2026 को अपनी सुनवाई के दौरान बताया कि EWS आरक्षण का आधार केवल आर्थिक स्थिति है। कोर्ट ने कहा कि SC, ST और OBC श्रेणियों का आरक्षण ऐतिहासिक और सामाजिक पिछड़ेपन पर आधारित है, जबकि आर्थिक स्थिति समय के साथ बदल सकती है। इसी अंतर की वजह से EWS उम्मीदवारों को उम्र और प्रयासों में वैसी छूट नहीं दी जा सकती जैसी अन्य आरक्षित वर्गों को मिलती है।
क्या मौजूदा 10 प्रतिशत आरक्षण नियम सही है?
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वर्तमान ढांचा, जिसमें EWS उम्मीदवारों को 10 प्रतिशत आरक्षण दिया जाता है, पूरी तरह संवैधानिक है। यह व्यवस्था संविधान (103वां संशोधन) अधिनियम, 2019 के तहत लागू की गई है। कोर्ट के अनुसार, यह नीति किसी भी संवैधानिक प्रावधान का उल्लंघन नहीं करती है।
क्या राज्य सरकारों के नियम केंद्र पर लागू होंगे?
अदालत ने इस बात पर भी जोर दिया कि कुछ राज्यों ने अपनी तरफ से EWS उम्मीदवारों को छूट दी हुई है, लेकिन वे नियम केंद्र सरकार पर बाध्यकारी नहीं हैं। कोर्ट ने कहा कि नीतिगत फैसले लेना सरकार (Executive) का काम है और जब तक कोई नीति मनमानी या असंवैधानिक न हो, तब तक अदालत उसमें दखल नहीं दे सकती।