Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने बीजेपी नेता Yogender Chandolia द्वारा पूर्व करोल बाग MLA Vishesh Ravi के खिलाफ दायर चुनाव याचिका को खत्म कर दिया है। कोर्ट ने कानूनी और प्रक्रियात्मक आधारों का हवाला देते हुए इस याचिका को अब बे
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने बीजेपी नेता Yogender Chandolia द्वारा पूर्व करोल बाग MLA Vishesh Ravi के खिलाफ दायर चुनाव याचिका को खत्म कर दिया है। कोर्ट ने कानूनी और प्रक्रियात्मक आधारों का हवाला देते हुए इस याचिका को अब बेअसर (infructuous) माना है, क्योंकि 2025 के विधानसभा चुनाव पहले ही हो चुके हैं।
क्या था पूरा मामला और विवाद की वजह
Yogender Chandolia ने आरोप लगाया था कि Vishesh Ravi ने 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान अपने नामांकन हलफनामे (Form 26) में अपनी शैक्षिक योग्यता के बारे में गलत जानकारी दी थी। इस आधार पर उन्होंने चुनाव को शून्य घोषित करने और Ravi के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की थी। Chandolia ने RP Act, 1951 की विभिन्न धाराओं के तहत उन्हें अयोग्य ठहराने की अपील की थी।
कोर्ट ने याचिका क्यों खारिज की
कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि शैक्षिक योग्यता के बारे में गलत जानकारी देना RP Act की धारा 123(4) के तहत ‘भ्रष्ट आचरण’ (corrupt practice) की श्रेणी में नहीं आता है। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट की फरवरी 2023 की उस टिप्पणी के बाद आया है जिसमें कहा गया था कि डिग्री या योग्यता की गलत जानकारी को भ्रष्ट आचरण नहीं माना जा सकता। इसी कानूनी स्थिति और समय सीमा बीत जाने के कारण कोर्ट ने इस याचिका पर आगे विचार करना बंद कर दिया है।
मामले का कानूनी सफर और अहम तारीखें
इस केस में दिसंबर 2020 में कोर्ट ने शुरू में इसे खारिज करने से मना किया था, लेकिन बाद में कानूनी व्याख्या बदली। 24 अप्रैल 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने साफ कर दिया कि गलत शैक्षिक दस्तावेज देना भ्रष्ट आचरण नहीं है। इसके अगले ही दिन 25 अप्रैल 2026 को कोर्ट ने पूरी याचिका को समाप्त कर दिया।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Yogender Chandolia ने Vishesh Ravi पर क्या आरोप लगाए थे?
उन्होंने आरोप लगाया था कि Vishesh Ravi ने 2020 के चुनाव नामांकन में अपनी पढ़ाई और डिग्री के बारे में गलत जानकारी दी थी।
दिल्ली हाई कोर्ट ने इस याचिका को क्यों खारिज किया?
कोर्ट ने माना कि शैक्षिक योग्यता की गलत जानकारी देना ‘भ्रष्ट आचरण’ नहीं है और 2025 के चुनाव के बाद यह याचिका अब बेअसर हो चुकी है।