Delhi High Court ने DU एडमिशन मामले में केंद्र सरकार और MHA को किया शामिल, शरणार्थी के पासपोर्ट पर मांगा जवाब

Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) में एडमिशन को लेकर एक अहम कदम उठाया है। कोर्ट ने म्यांमार के एक शरणार्थी की याचिका पर सुनवाई करते हुए इसमें केंद्र सरकार, गृह मंत्रालय (MHA) और विदेश मंत्रालय (MEA) को भ

Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) में एडमिशन को लेकर एक अहम कदम उठाया है। कोर्ट ने म्यांमार के एक शरणार्थी की याचिका पर सुनवाई करते हुए इसमें केंद्र सरकार, गृह मंत्रालय (MHA) और विदेश मंत्रालय (MEA) को भी शामिल कर लिया है। यह पूरा मामला विदेशी छात्रों के लिए ग्रेजुएशन कोर्स में एडमिशन के समय पासपोर्ट की अनिवार्यता को लेकर है।

यह मामला हेनरी हटू ऑंग लिन नाम के एक म्यांमार नागरिक का है, जिन्हें UNHCR ने शरणार्थी के तौर पर मान्यता दी है। उन्होंने 28 मई 2026 को Foreign Students’ Registry (FSR) के जरिए 2026-27 सत्र के लिए आवेदन किया था। यूनिवर्सिटी ने पासपोर्ट न होने की वजह से उनके आवेदन को अधूरा बताकर खारिज कर दिया। हेनरी और उनका परिवार 2022 में राजनीतिक अस्थिरता के कारण म्यांमार छोड़कर भारत आया था और वे UNHCR के संरक्षण में रह रहे हैं।

10 जुलाई 2026 को जब यह मामला पहली बार कोर्ट पहुंचा, तो जस्टिस जस्मीत सिंह ने यूनिवर्सिटी के इस नियम पर सवाल उठाए। कोर्ट ने पूछा कि एक शरणार्थी से पासपोर्ट की उम्मीद कैसे की जा सकती है। याचिकाकर्ता के वकीलों ने दलील दी कि यूनिवर्सिटी के नियमों में UNHCR शरणार्थी प्रमाण पत्र को स्वीकार करने की बात कही गई है और तिब्बती नागरिकों के लिए भी वैकल्पिक दस्तावेजों की अनुमति दी जाती है, फिर म्यांमार के शरणार्थी के साथ ऐसा भेदभाव क्यों किया जा रहा है।

सोमवार 13 जुलाई 2026 को हुई सुनवाई में जस्टिस जस्मीत सिंह ने केंद्र सरकार, गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय को इस मामले में जवाब देने के निर्देश दिए। कोर्ट चाहता है कि ये विभाग स्पष्ट करें कि क्या UNHCR मान्यता प्राप्त शरणार्थी या शरण चाहने वाले व्यक्ति को बिना पासपोर्ट के एडमिशन दिया जा सकता है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई 2026 को होगी।