Delhi High Court ने hit-and-run केस में BNS की धारा 106(2) लागू करने वाली PIL खारिज की

Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को एक जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया है। इस याचिका में मांग की गई थी कि हिट-एंड-रन मामलों से जुड़ी भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 106(2) को तुरंत लागू किया जाए। कोर्ट ने सा

Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को एक जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया है। इस याचिका में मांग की गई थी कि हिट-एंड-रन मामलों से जुड़ी भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 106(2) को तुरंत लागू किया जाए। कोर्ट ने साफ कहा कि किसी कानून के प्रावधान को कब और कैसे लागू करना है, यह पूरी तरह से केंद्र सरकार का फैसला होता है।

चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने बताया कि BNS 2023 की धारा 1(2) केंद्र सरकार को यह अधिकार देती है कि वह अलग-अलग प्रावधानों के लिए अलग-अलग तारीखें तय कर सके। सुनवाई के दौरान जब याचिकाकर्ता ने राजनीतिक संदर्भ दिए, तो बेंच ने उन्हें मौखिक रूप से चेतावनी देते हुए कहा कि इसे राजनीतिक मुद्दा न बनाएं।

दरअसल, BNS की धारा 106(2) के तहत उन ड्राइवरों के लिए 10 साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है, जो लापरवाही से गाड़ी चलाकर किसी की जान लेते हैं और पुलिस या मजिस्ट्रेट को खबर किए बिना मौके से भाग जाते हैं। बता दें कि 25 दिसंबर 2023 को लागू हुए BNS के ज्यादातर नियम 1 जुलाई 2024 से प्रभावी हो गए थे, लेकिन धारा 106(2) को लागू नहीं किया गया। जनवरी 2024 में ट्रक ड्राइवरों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर के बड़े विरोध प्रदर्शनों के बाद सरकार ने इस धारा को फिलहाल रोकने का भरोसा दिया था।

वहीं, धारा 106(1) अभी भी लागू है, जिसमें लापरवाही से मौत होने पर अगर ड्राइवर हादसे की जानकारी पुलिस को देता है, तो उसे 5 साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है। वकील रितु गाबा ने यह याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने दिल्ली पुलिस से मांग की थी कि इस धारा को लागू न करने के लिए केंद्रीय मंत्री अमित शाह, विपक्ष के नेता राहुल गांधी और सभी सांसदों के खिलाफ FIR दर्ज की जाए। इससे पहले दिसंबर 2024 में गुवाहाटी हाई कोर्ट ने भी पुलिस को निर्देश दिया था कि वह इस धारा के तहत केस दर्ज न करे क्योंकि यह अभी लागू नहीं हुई है।