Delhi: दिल्ली हाईकोर्ट ने एक नाबालिग बच्चे को कनाडा भेजने के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी (CARA) को आदेश दिया है कि वह बच्चे के स्थानांतरण के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जार
Delhi: दिल्ली हाईकोर्ट ने एक नाबालिग बच्चे को कनाडा भेजने के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी (CARA) को आदेश दिया है कि वह बच्चे के स्थानांतरण के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी करे। यह निर्देश 21 अप्रैल, 2026 को दिया गया है ताकि कानूनी प्रक्रिया पूरी हो सके।
CARA क्या है और इसका क्या काम है?
CARA महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार के तहत आने वाली एक वैधानिक संस्था है। इसका मुख्य काम भारत में बच्चों के गोद लेने की प्रक्रिया की निगरानी करना और उसे रेगुलेट करना है। यह संस्था देश के अंदर और दूसरे देशों में बच्चों को गोद देने (इंटर-कंट्री एडॉप्शन) के लिए नोडल एजेंसी के रूप में काम करती है।
कोर्ट ने NOC जारी करने के लिए क्या कहा?
दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि एडॉप्शन रेगुलेशन के तहत जो कानूनी जिम्मेदारियां हैं, उन्हें सिर्फ एक सपोर्ट लेटर देकर खत्म नहीं किया जा सकता। कोर्ट के मुताबिक, वैधानिक दायित्वों का पालन करना जरूरी है। यह पूरी प्रक्रिया किशोर न्याय अधिनियम, 2015 और एडॉप्शन रेगुलेशन 2022 के नियमों के हिसाब से चलती है।
गोद लेने की प्रक्रिया के मुख्य नियम क्या हैं?
- यह प्रक्रिया हेग कन्वेंशन ऑन इंटर-कंट्री एडॉप्शन, 1993 के प्रावधानों के अनुसार होती है।
- CARA ने बच्चों के रिकॉर्ड की सुरक्षा और पारदर्शिता के लिए देशव्यापी निर्देश जारी किए हैं।
- गोद लिए जाने वाले बच्चों की पहचान की गोपनीयता बनाए रखना अनिवार्य है।
- सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना जरूरी है ताकि बच्चे का भविष्य सुरक्षित रहे।