Delhi High Court ने 85 वकीलों को बनाया ‘सीनियर एडवोकेट’, 2024 के विवाद के बाद लिया फैसला

Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक बड़ी बैठक के बाद 85 वकीलों को ‘सीनियर एडवोकेट’ के पद पर नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है। यह फैसला गुरुवार शाम (9 जुलाई 2026) को हुई फुल कोर्ट मीटिंग में लिया गया। साल 2024 में कई

Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक बड़ी बैठक के बाद 85 वकीलों को ‘सीनियर एडवोकेट’ के पद पर नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है। यह फैसला गुरुवार शाम (9 जुलाई 2026) को हुई फुल कोर्ट मीटिंग में लिया गया। साल 2024 में कई आवेदनों के खारिज होने के बाद काफी विवाद हुआ था, जिसके बाद अब यह नई लिस्ट जारी की गई है। कुल 86 नामों पर विचार हुआ था, जिनमें से 85 को मंजूरी मिली और एक नाम पर असहमति जताई गई।

यह पूरी प्रक्रिया ‘हाई कोर्ट ऑफ दिल्ली डेजिग्नेशन ऑफ सीनियर एडवोकेट रूल्स, 2024’ के तहत पूरी की गई। बता दें कि नवंबर 2024 में जब 302 उम्मीदवारों में से 165 को रिजेक्ट किया गया था, तब काफी हंगामा हुआ था। उस समय सीनियर एडवोकेट सुधीर ननदजोग ने यह आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया था कि फाइनल लिस्ट उनकी सहमति के बिना तैयार की गई और प्रक्रिया में कमियां थीं। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट को उन उम्मीदवारों पर फिर से विचार करने का निर्देश दिया था जिनके आवेदन खारिज या लंबित थे।

इस बार की चयन प्रक्रिया में उम्मीदवारों के इंटरव्यू काफी कड़े रहे, जिसे वकीलों ने एक सकारात्मक बदलाव बताया है। नियुक्त होने वाले वकीलों में ED के स्पेशल काउंसिल जोहेब हुसैन, नितेश राणा, दिल्ली सरकार के स्टैंडिंग काउंसिल संजय लाओ, सत्यकाम और स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर अमित प्रसाद जैसे नाम शामिल हैं। साथ ही, मनाली सिंघल समेत 10 महिला वकीलों को भी सीनियर एडवोकेट का दर्जा मिला है।

नियमों की बात करें तो कोर्ट ने रूल 9B को बरकरार रखा है। इसके मुताबिक, दिल्ली हायर ज्यूडिशियल सर्विस (DHJS) के रिटायर्ड न्यायिक अधिकारी, जिन्होंने कम से कम दस साल सेवा की हो, वही इस पद के पात्र होंगे। अन्य राज्यों के रिटायर्ड जज इसके दायरे से बाहर रहेंगे। कोर्ट ने साफ किया कि सीनियर एडवोकेट बनना एक विशेषाधिकार है, न कि कोई बुनियादी अधिकार। यह दर्जा केवल उन वकीलों को मिलता है जिनकी कानूनी विशेषज्ञता और योगदान असाधारण होता है।