Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने 22.92 करोड़ रुपये के ‘डिजिटल अरेस्ट’ घोटाले में शामिल चार आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस मनोज जैन ने कहा कि इस तरह के संगठित अपराध का समाज पर बहुत बुरा असर पड़ता है
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने 22.92 करोड़ रुपये के ‘डिजिटल अरेस्ट’ घोटाले में शामिल चार आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस मनोज जैन ने कहा कि इस तरह के संगठित अपराध का समाज पर बहुत बुरा असर पड़ता है और आरोपी इस साजिश के अहम हिस्से थे। यह मामला एक रिटायर्ड बैंकर के साथ हुई बड़ी धोखाधड़ी से जुड़ा है, जिसकी जांच अब CBI कर रही है।
डिजिटल अरेस्ट घोटाले में क्या हुआ और कौन हैं आरोपी?
इस मामले में 78 साल के रिटायर्ड बैंकर Naresh Malhotra को डराकर अगस्त और सितंबर 2025 के बीच उनसे 22.92 करोड़ रुपये ठग लिए गए। कोर्ट ने अशोक कुमार, मोहित, विपुल राणा और हिमांशु सिंह की जमानत याचिकाएं नामंजूर कर दीं। मोहित नाम का आरोपी M/s Hyrocial Facility Management Private Limited का डायरेक्टर था, जिसके IndusInd Bank खाते में ठगी के 1.90 करोड़ रुपये पहुंचे थे।
कोर्ट और जांच एजेंसियों ने क्या कहा?
जस्टिस मनोज जैन ने बताया कि डिजिटल अरेस्ट के जरिए बुजुर्गों को निशाना बनाना एक गंभीर अपराध है। उन्होंने कहा कि डिजिटल सबूतों के साथ छेड़छाड़ आसान होती है, इसलिए आरोपियों से हिरासत में पूछताछ जरूरी है। इस केस की FIR दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने BNS की धारा 308, 318(4), 319 और 340 के तहत दर्ज की थी, जिसे मार्च 2026 में CBI को सौंप दिया गया।
पीड़ित को कितना पैसा वापस मिला और क्या है ताजा स्थिति?
RBI के इंटीग्रेटेड ओम्बुड्समैन स्कीम के तहत 25 फरवरी 2026 को एक आदेश जारी हुआ। इसमें पांच बैंकों को पीड़ित को कुल 1.31 करोड़ रुपये देने का निर्देश दिया गया। इन बैंकों की लिस्ट नीचे दी गई है:
| बैंक का नाम |
भूमिका |
| Axis Bank |
Beneficiary Bank |
| City Union Bank |
Beneficiary Bank |
| ICICI Bank |
Beneficiary Bank |
| IndusInd Bank |
Beneficiary Bank |
| Yes Bank |
Beneficiary Bank |
पीड़ित Naresh Malhotra ने अब RBI के पास पूरी रकम, ब्याज और हर्जाने के लिए अपील की है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने भी इस खतरे पर चिंता जताई है और सरकार एक डेडिकेटेड हेल्पलाइन शुरू करने पर काम कर रही है।