Delhi: बिजनेसमैन Anil Ambani ने NDTV और कुछ अन्य मीडिया संस्थानों के खिलाफ मानहानि का केस किया था। उन्होंने मांग की थी कि NDTV उनके बारे में खबरें तुरंत छापना बंद करे, लेकिन Delhi High Court ने इस मांग को मानने से इनकार
Delhi: बिजनेसमैन Anil Ambani ने NDTV और कुछ अन्य मीडिया संस्थानों के खिलाफ मानहानि का केस किया था। उन्होंने मांग की थी कि NDTV उनके बारे में खबरें तुरंत छापना बंद करे, लेकिन Delhi High Court ने इस मांग को मानने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी (Freedom of Speech) एक बड़ा अधिकार है और बिना पूरी जांच के खबरों पर रोक नहीं लगाई जा सकती।
अनिल अंबानी ने कोर्ट में क्या आरोप लगाए?
Anil Ambani के वकील ने कोर्ट को बताया कि NDTV ने पिछले कुछ महीनों में लगभग 72 लेख छापे हैं जो मानहानि करने वाले हैं। उनका कहना था कि इन खबरों में उन्हें जानबूझकर Reliance ग्रुप की कंपनियों के केस से जोड़ा गया, जबकि वह उन संस्थाओं से अलग हैं। अंबानी की तरफ से यह भी आरोप लगाया गया कि यह एक सोची-समझी साजिश है ताकि मार्केट में घबराहट फैले और Adani Group उनकी कंपनियों को आसानी से अपने कब्जे में ले सके।
कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया और अब आगे क्या होगा?
Justice Subramonium Prasad ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि संविधान के Article 19(1)(a) के तहत फ्री स्पीच का अधिकार बहुत जरूरी है। कोर्ट ने साफ किया कि पहली सुनवाई में ही पब्लिकेशन पर रोक लगाने वाले आदेश आमतौर पर नहीं दिए जाते। कोर्ट ने NDTV और अन्य प्रतिवादियों को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 18 जुलाई 2026 या 19 जुलाई 2026 को होगी।
केस में कौन-कौन से मुख्य लोग और कंपनियां शामिल हैं?
| पक्ष |
नाम/संस्था |
| वादी (Plaintiff) |
Anil Ambani |
| प्रतिवादी (Defendants) |
NDTV, NDTV Convergence Ltd, Rahul Kanwal, Manoranjan Bharti, Tamanna Inamdar, IANS Private Limited |
| संबंधित ग्रुप |
Adani Group, Reliance ADA Group |
| जांच एजेंसियां |
CBI, ED |
Frequently Asked Questions (FAQs)
अनिल अंबानी ने NDTV के खिलाफ कोर्ट जाने का क्या कारण बताया?
अंबानी का आरोप है कि NDTV ने उनके खिलाफ 72 मानहानि वाले लेख छापे हैं और यह Adani Group की मदद करने के लिए चलाया गया एक कैंपेन है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने खबरों पर रोक क्यों नहीं लगाई?
कोर्ट ने संविधान के Article 19(1)(a) यानी अभिव्यक्ति की आजादी का हवाला दिया और कहा कि पहली सुनवाई में ही मीडिया की खबरों पर रोक लगाना सही नहीं है।