Delhi High Court ने वैवाहिक विवादों में रेप के आरोपों के ‘नए ट्रेंड’ पर जताई चिंता, ट्रायल पर लगाई रोक
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने वैवाहिक झगड़ों में यौन अपराध के आरोप लगाने के बढ़ते चलन पर गंभीर चिंता जताई है। कोर्ट ने एक मामले में दो भाइयों के खिलाफ चल रहे ट्रायल पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिन पर उनकी भाभी ने रेप और क्रूरत
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने वैवाहिक झगड़ों में यौन अपराध के आरोप लगाने के बढ़ते चलन पर गंभीर चिंता जताई है। कोर्ट ने एक मामले में दो भाइयों के खिलाफ चल रहे ट्रायल पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिन पर उनकी भाभी ने रेप और क्रूरता के आरोप लगाए थे। कोर्ट का मानना है कि कुछ मामलों में ससुराल पक्ष पर पैसों के लिए दबाव बनाने के लिए ऐसे गंभीर आरोप जोड़े जा रहे हैं।
यह मामला संगम विहार पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR से जुड़ा है। कोर्ट ने पाया कि पति ने सितंबर 2023 में तलाक की अर्जी दी थी, जिसके सात महीने बाद अप्रैल 2024 में FIR दर्ज कराई गई। रेप का आरोप सबसे पहले जून 2024 में CrPC की धारा 164 के तहत दिए गए बयान में सामने आया, जबकि कथित घटना 2017 की बताई गई। न्यायमूर्ति गिरीश कथपालिया की पीठ ने इस बात पर गौर किया कि 2014 में सुप्रीम कोर्ट के अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य फैसले के बाद, जिसमें दहेज उत्पीड़न (IPC 498A) के मामलों में सीधी गिरफ्तारी पर रोक लगी थी, अब लोग दबाव बनाने के लिए रेप और छेड़छाड़ जैसे आरोप लगा रहे हैं।
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता ऋषि मल्होत्रा ने दलील दी कि यह FIR तलाक की याचिका के बदले में दर्ज कराई गई थी। वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता गीता लूथरा ने सुझाव दिया कि असली और झूठे मामलों की पहचान के लिए एक सर्वे कराया जाना चाहिए। हाई कोर्ट ने अब इस मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर, 2026 को तय की है।