Delhi में POCSO केस: महिला टीचर की जमानत रद्द, हाई कोर्ट ने 3 दिन में सरेंडर करने का दिया आदेश

Delhi: पश्चिम दिल्ली के जनकपुरी इलाके के एक प्राइवेट स्कूल में तीन साल की बच्ची के साथ हुए यौन शोषण के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने इस मामले में आरोपी महिला टीचर की जमानत रद्द कर दी है और

Delhi: पश्चिम दिल्ली के जनकपुरी इलाके के एक प्राइवेट स्कूल में तीन साल की बच्ची के साथ हुए यौन शोषण के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने इस मामले में आरोपी महिला टीचर की जमानत रद्द कर दी है और उसे तीन दिनों के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया है। यह फैसला दिल्ली पुलिस की उस याचिका पर आया जिसमें टीचर को मिली जमानत को चुनौती दी गई थी।

यह पूरा मामला जनकपुरी के एक प्राइवेट स्कूल का है, जहां एक स्टाफ सदस्य द्वारा तीन साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म के आरोप लगे थे। महिला टीचर पर आरोप है कि उसने इस गंभीर घटना को अधिकारियों से छिपाया और मामले को दबाने की कोशिश की। इस वजह से उसे गिरफ्तार किया गया था।

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस सौरभ बनर्जी ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने टीचर को जमानत देते समय जरूरी बातों को नजरअंदाज किया। कोर्ट ने माना कि POCSO एक्ट के तहत आरोपों की गंभीरता को देखते हुए निचली अदालत का जमानत देने का फैसला गलत था।

इससे पहले 29 जून 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट ने इस केस के मुख्य आरोपी स्कूल केयरटेकर ललित कुमार की जमानत भी रद्द कर दी थी और उसे 1 जुलाई तक सरेंडर करने को कहा था। महिला टीचर को द्वारका कोर्ट के एडिशनल सेशन्स जज (POCSO) ने 20 मई 2026 को नियमित जमानत दी थी, जिसे अब हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है।