Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट एक बहुत जरूरी कानूनी सवाल पर विचार कर रहा है। मामला इस बात का है कि अगर भारत के Attorney General किसी आपराधिक अवमानना (Criminal Contempt) की कार्यवाही के लिए अपनी अनुमति देने से मना कर देते हैं, त
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट एक बहुत जरूरी कानूनी सवाल पर विचार कर रहा है। मामला इस बात का है कि अगर भारत के Attorney General किसी आपराधिक अवमानना (Criminal Contempt) की कार्यवाही के लिए अपनी अनुमति देने से मना कर देते हैं, तो क्या उस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। जस्टिस पुरुषिंद्र कुमार कौरव इस याचिका पर सुनवाई कर रहे हैं।
क्या है पूरा मामला और विवाद की वजह
यह मामला Venkatesh S नाम के व्यक्ति द्वारा दायर किया गया है। उन्होंने The Wire, LiveLaw और LiveLaw के मैनेजिंग एडिटर मनु Sebastian के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग की थी। यह मांग अप्रैल 2019 में छपे एक लेख को लेकर थी। हालांकि, Attorney General आर. वेंकटरामणी ने 30 नवंबर 2023 को इस कार्यवाही के लिए अपनी सहमति देने से इनकार कर दिया था। अब इस इनकार के आदेश को चुनौती दी गई है।
कानूनी नियम और कोर्ट की अगली कार्रवाई
कोर्ट अब संविधान के Article 226 और Contempt of Courts Act, 1971 की धारा 15 की जांच कर रहा है। नियम के मुताबिक, किसी निजी नागरिक द्वारा आपराधिक अवमानना शुरू करने के लिए Attorney General या Advocate General की मंजूरी जरूरी होती है ताकि फालतू की याचिकाओं से बचा जा सके और कोर्ट का समय बर्बाद न हो। दिल्ली हाई कोर्ट ने माना है कि अलग-अलग हाई कोर्ट्स की इस पर अलग-अलग राय है, इसलिए इस पर विस्तार से विचार करना जरूरी है। कोर्ट ने विपक्षी पार्टी को जवाब दाखिल करने को कहा है और अगली सुनवाई 29 सितंबर 2026 तय की गई है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Attorney General की सहमति क्यों जरूरी होती है?
Contempt of Courts Act, 1971 की धारा 15 के तहत यह नियम है ताकि कोर्ट में बेवजह की याचिकाएं न आएं और न्यायिक समय की बचत हो सके।
इस मामले की अगली सुनवाई कब है?
दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 29 सितंबर 2026 की तारीख तय की है।