Delhi: जंतर मंतर विरोध प्रदर्शन के दौरान इंटरनेट बंद करने वाले केस से पीछे हटा SFLC, हाई कोर्ट ने दी याचिका वापस लेने की मंजूरी
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को Software Freedom Law Centre, India (SFLC.In) को अपनी जनहित याचिका (PIL) वापस लेने की अनुमति दे दी है। यह याचिका गृह मंत्रालय (MHA) के उन आदेशों को चुनौती देने के लिए दायर की गई थी, जि
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को Software Freedom Law Centre, India (SFLC.In) को अपनी जनहित याचिका (PIL) वापस लेने की अनुमति दे दी है। यह याचिका गृह मंत्रालय (MHA) के उन आदेशों को चुनौती देने के लिए दायर की गई थी, जिनके तहत जंतर मंतर के आसपास मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई थीं। यह पूरा मामला प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों से जुड़ा था।
दरअसल, 20 जून 2026 को Cockroach Janta Party (CJP) ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर मंतर पर प्रदर्शन शुरू किया था। इसके बाद गृह मंत्रालय ने सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था का हवाला देते हुए कई बार इंटरनेट बंद करने के आदेश दिए। 23 जुलाई 2026 को भी शाम 4 बजे से आधी रात तक जंतर मंतर के 1.5 किलोमीटर के दायरे में मोबाइल इंटरनेट बंद कर दिया गया था। एक हफ्ते में इस तरह के छह बार इंटरनेट बंद करने के फैसले को SFLC.In ने अदालत में चुनौती दी थी।
SFLC.In का तर्क था कि इंटरनेट बंद करने के ये आदेश गैरकानूनी और असंवैधानिक हैं। याचिका में कहा गया था कि सरकार ने यह नहीं बताया कि इंटरनेट पूरी तरह बंद करना क्यों जरूरी था और क्या इसके अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था। याचिका में सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले का भी जिक्र था, जिसमें इंटरनेट तक पहुंच को एक मौलिक अधिकार माना गया था।
वहीं दूसरी ओर, सरकार की तरफ से पीएमओ में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया था कि सरकार ने Cockroach Janta Party (CJP) के साथ बातचीत के लिए पिछले 24 घंटों में चार बार प्रस्ताव भेजे थे, लेकिन पार्टी की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला। यह पूरा मामला मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की बेंच के सामने था। सोमवार को कोर्ट ने याचिकाकर्ता को अपनी याचिका वापस लेने की इजाजत दे दी।