Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक ऐसा फैसला सुनाया है जिसने व्यक्तिगत आजादी और प्यार की जीत को प्राथमिकता दी है। कोर्ट ने 100% नेत्रहीन एक ऐसे जोड़े को साथ रहने की इजाजत दी है जो अलग-अलग धर्मों से ताल्लुक रखते हैं। जस्टिस नव
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक ऐसा फैसला सुनाया है जिसने व्यक्तिगत आजादी और प्यार की जीत को प्राथमिकता दी है। कोर्ट ने 100% नेत्रहीन एक ऐसे जोड़े को साथ रहने की इजाजत दी है जो अलग-अलग धर्मों से ताल्लुक रखते हैं। जस्टिस नविन चावला और जस्टिस रविंदर dudeja की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की और जोड़े को पुलिस सुरक्षा देने का आदेश दिया ताकि वे बिना किसी डर के साथ रह सकें।
मामला क्या था और कोर्ट तक कैसे पहुंचे
यह मामला राम कृपाल नाम के व्यक्ति से जुड़ा है जो हिंदू हैं और उनकी पार्टनर मुस्लिम हैं, दोनों ही पूरी तरह से नेत्रहीन हैं। आरोप है कि 16 और 17 मार्च 2026 को महिला के परिवार वालों ने उसे जबरन अपने पास रखा और कैद कर लिया था। इसके बाद 21 मार्च को महिला ने राम कृपाल से संपर्क किया और अपनी इच्छा जताई कि वह उनके साथ रहना और शादी करना चाहती है। राम कृपाल ने 12 अप्रैल को पुलिस में शिकायत की थी, लेकिन जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
कोर्ट ने क्या आदेश दिए और क्या कहा
कोर्ट ने महिला से बात की, जिसमें उसने साफ तौर पर कहा कि वह राम कृपाल के साथ रहना चाहती है। हालांकि महिला के पिता इस रिश्ते के खिलाफ थे, लेकिन कोर्ट ने महिला की मर्जी को ऊपर रखा क्योंकि वह बालिग है। कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत किसी भी वयस्क व्यक्ति को अपना जीवनसाथी चुनने का पूरा अधिकार है और इसे छीना नहीं जा सकता।
सुरक्षा और मदद के लिए क्या इंतजाम होंगे
- दिल्ली पुलिस को आदेश दिया गया है कि वह जोड़े को सुरक्षित उनके चुने हुए घर तक पहुँचाए।
- स्थानीय बीट कांस्टेबल को निर्देश दिया गया है कि वह आपातकालीन मदद के लिए अपना संपर्क नंबर जोड़े के साथ साझा करे।
- कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति को उसकी मर्जी के खिलाफ मजबूर नहीं किया जा सकता।