Delhi High Court का बड़ा फैसला, 17 साल के बेटे को पिता के लिए लीवर डोनेट करने की मिली मंजूरी
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक दुर्लभ मामले में 17 साल के नाबालिग लड़के को अपने पिता को लीवर का हिस्सा दान करने की अनुमति दे दी है। यह फैसला जस्टिस मिनी पुष्करणा की वेकेशन बेंच ने 29 जून 2026 को सुनाया। पिता गंभीर लीवर बी
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक दुर्लभ मामले में 17 साल के नाबालिग लड़के को अपने पिता को लीवर का हिस्सा दान करने की अनुमति दे दी है। यह फैसला जस्टिस मिनी पुष्करणा की वेकेशन बेंच ने 29 जून 2026 को सुनाया। पिता गंभीर लीवर बीमारी से जूझ रहे हैं और उनके बचने का यही एकमात्र रास्ता बचा था।
मामला उत्तम कुमार शॉ का है, जो लीवर सिरोसिस और हेपेटोसेलुलर कार्सिनोमा जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं। उनके इलाज के लिए लीवर ट्रांसप्लांट ही एकमात्र विकल्प था। उनके 17 वर्षीय बेटे प्रतीक शॉ ने स्वेच्छा से अपने पिता को लीवर डोनेट करने की इच्छा जताई थी। जांच में पाया गया कि परिवार के अन्य रिश्तेदारों में से प्रतीक ही एकमात्र उपयुक्त डोनर थे।
अदालत ने Transplantation of Human Organs and Tissues Rules, 2014 के नियम 5(3)(g) का हवाला दिया। सामान्य तौर पर नाबालिगों द्वारा अंग दान करना मना है, लेकिन विशेष चिकित्सा परिस्थितियों में सरकार की मंजूरी के बाद ऐसा किया जा सकता है। दिल्ली सरकार ने कोर्ट को बताया कि उपराज्यपाल (L-G) और सक्षम अधिकारी ने 29 जून 2026 को इस डोनेशन के लिए अपनी मंजूरी दे दी है।
जस्टिस मिनी पुष्करणा ने कहा कि कानून में नाबालिग द्वारा अंग दान पर कोई पूर्ण रोक नहीं है, बशर्ते कि वह विशेष परिस्थितियों में हो और सभी कानूनी नियमों का पालन किया गया हो। कोर्ट ने बेटे के अपने पिता के प्रति प्रेम और लगाव को देखते हुए यह फैसला सुनाया, क्योंकि अनुमति न मिलने पर पिता की जान जा सकती थी।
कोर्ट ने निर्देश दिया कि यह पूरी प्रक्रिया सभी कानूनी, नैतिक और क्लिनिकल प्रोटोकॉल के तहत की जाए ताकि डोनर की सेहत और सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। Institute of Liver and Biliary Sciences (ILBS), जहां पिता का इलाज चल रहा है, ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि वे जल्द से जल्द सर्जरी का समय तय करेंगे।