Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक ऐसा फैसला सुनाया है जो कई परिवारों के लिए उम्मीद की किरण बन सकता है। कोर्ट ने कोमा में पड़े एक भारतीय सेना के सैनिक की पत्नी को IVF के जरिए मां बनने की इजाजत दे दी है। अदालत ने कहा कि संतान
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक ऐसा फैसला सुनाया है जो कई परिवारों के लिए उम्मीद की किरण बन सकता है। कोर्ट ने कोमा में पड़े एक भारतीय सेना के सैनिक की पत्नी को IVF के जरिए मां बनने की इजाजत दे दी है। अदालत ने कहा कि संतान सुख इंसान के हाथ में नहीं बल्कि किस्मत का खेल है।
क्या है पूरा मामला और कोर्ट ने क्या कहा
यह मामला एक सैनिक और उनकी पत्नी का है। जुलाई 2025 में जम्मू-कश्मीर में ड्यूटी के दौरान यह सैनिक गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिसके बाद से वे कोमा (वेजिटेटिव स्टेट) में हैं। दंपति ने 2023 में IVF का रास्ता चुना था, लेकिन हादसे के बाद यह प्रक्रिया रुक गई थी। न्यायमूर्ति पुरुशेंद्र कुमार कौरव ने 13 अप्रैल 2026 को फैसला सुनाते हुए कहा कि प्रजनन स्वायत्तता एक मौलिक अधिकार है और इसे बाधित नहीं किया जाना चाहिए। कोर्ट ने भागवत पुराण का जिक्र करते हुए कहा कि संतान का सुख ‘दैव’ यानी किस्मत पर निर्भर करता है।
IVF प्रक्रिया और कानूनी अड़चनें
इस मामले में कुछ मुख्य कानूनी और मेडिकल बिंदु सामने आए:
- यूनियन ऑफ इंडिया ने पति की ताज़ा सहमति न होने का हवाला देकर याचिका का विरोध किया था।
- कोर्ट ने माना कि 2023 में दी गई पूर्व सहमति ART एक्ट 2021 की धारा 22 के तहत वैध है।
- आर्मी अस्पताल (R&R) के मेडिकल बोर्ड ने बताया कि शुक्राणु निकालना तकनीकी रूप से संभव है, हालांकि सफल होने की संभावना कम है।
- अदालत ने निर्देश दिया कि केवल लिखित सहमति न होने के कारण इस प्रक्रिया को नहीं रोका जा सकता।
कोर्ट के फैसले की मुख्य बातें
| बिंदु |
विवरण |
| निर्णय की तारीख |
13 अप्रैल 2026 |
| संबंधित कानून |
ART एक्ट 2021 और अनुच्छेद 21 |
| अस्पताल |
आर्मी अस्पताल (R&R), दिल्ली कैंट |
| मुख्य आधार |
मातृत्व और प्रजनन स्वायत्तता का अधिकार |