Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रजनन अधिकारों को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने 50 साल की एक महिला को अपने फ्रोजन एम्ब्रियो (frozen embryos) का इस्तेमाल करने की इजाजत दे दी है। कोर्ट ने साफ कहा कि तकनीकी नियमों के का
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रजनन अधिकारों को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने 50 साल की एक महिला को अपने फ्रोजन एम्ब्रियो (frozen embryos) का इस्तेमाल करने की इजाजत दे दी है। कोर्ट ने साफ कहा कि तकनीकी नियमों के कारण किसी व्यक्ति के माता-पिता बनने के अधिकार को नहीं छीना जा सकता।
मामला क्या था और अस्पताल ने क्यों किया था मना?
एक महिला और उनके पति ने अपने फ्रोजन एम्ब्रियो को इस्तेमाल करने के लिए याचिका दायर की थी। Cloudnine Hospital, Dwarka ने इस इलाज को करने से मना कर दिया था। अस्पताल का कहना था कि ART Act के नियमों के मुताबिक महिला की उम्र 50 साल से ज्यादा हो गई है, इसलिए अब यह प्रक्रिया नहीं की जा सकती। इस मामले में जस्टिस Purushaindra Kumar Kaurav ने सुनवाई की और अपना फैसला सुनाया।
कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा?
कोर्ट ने कहा कि ART Act, 2021 का मकसद इलाज को सुरक्षित और नैतिक बनाना है, न कि लोगों के लिए ऐसी रुकावटें खड़ी करना जिन्हें पार न किया जा सके। जस्टिस कौरव ने बताया कि जब एम्ब्रियो निकाले गए थे, तब महिला तय उम्र सीमा के अंदर थीं। कोर्ट के मुताबिक, प्रजनन का अधिकार और परिवार बसाने की इच्छा को सिर्फ तकनीकी नियमों के आधार पर खत्म नहीं किया जा सकता।
सरकार की दलील और कोर्ट का रुख
सरकार ने इस याचिका का विरोध किया था। सरकार ने एक एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि ज्यादा उम्र में गर्भधारण करने से मां और बच्चे दोनों के लिए स्वास्थ्य जोखिम बढ़ जाते हैं। हालांकि, कोर्ट ने पाया कि इस मामले में ऐसा कोई खास मेडिकल सबूत नहीं है जो यह बताए कि महिला के लिए यह जोखिम सामान्य से बहुत ज्यादा है। कोर्ट ने अब अस्पताल को निर्देश दिया है कि वह मेडिकल सुरक्षा नियमों का पालन करते हुए बाकी बचे पांच एम्ब्रियो को ट्रांसफर करे।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ART Act के तहत उम्र की क्या सीमा है?
ART Act, 2021 के सेक्शन 21(g) के अनुसार, असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी प्रक्रियाओं के लिए महिलाओं की उम्र 50 वर्ष से कम और पुरुषों की उम्र 55 वर्ष से कम होनी चाहिए।
दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में क्या राहत दी?
कोर्ट ने 50 साल और 2 महीने की महिला को अपने पहले से सुरक्षित (cryopreserved) एम्ब्रियो इस्तेमाल करने की अनुमति दी है, क्योंकि एम्ब्रियो तब निकाले गए थे जब महिला उम्र सीमा के अंदर थी।