Delhi High Court ने रिटायर्ड मेजर जनरल को आय से अधिक संपत्ति मामले में किया बरी, CBI के आरोपों को कोर्ट ने नकारा
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने सीबीआई (CBI) द्वारा दर्ज आय से अधिक संपत्ति के एक पुराने मामले में रिटायर्ड मेजर जनरल आनंद कुमार कपूर की सजा को रद्द कर दिया है। जस्टिस जसमीत सिंह ने अपने फैसले में कहा कि सीबीआई यह साबित करने
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने सीबीआई (CBI) द्वारा दर्ज आय से अधिक संपत्ति के एक पुराने मामले में रिटायर्ड मेजर जनरल आनंद कुमार कपूर की सजा को रद्द कर दिया है। जस्टिस जसमीत सिंह ने अपने फैसले में कहा कि सीबीआई यह साबित करने में नाकाम रही कि मेजर जनरल के पास उनकी कमाई से ज्यादा संपत्ति थी। कोर्ट ने माना कि इस केस में आरोपी को अपनी बात रखने का सही मौका नहीं मिला था।
यह पूरा मामला अक्टूबर 2007 में सीबीआई द्वारा दर्ज की गई एफआईआर से शुरू हुआ था। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया था कि मेजर जनरल कपूर ने 14 नवंबर 1971 से 10 अक्टूबर 2007 के बीच अपनी आय से ज्यादा संपत्ति जमा की थी। इस मामले में 27 सितंबर 2016 को पटियाला हाउस कोर्ट के स्पेशल जज ने उन्हें दोषी ठहराते हुए एक साल की सख्त कैद, 50 हजार रुपये जुर्माना और 2.22 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त करने का आदेश दिया था।
हाई कोर्ट ने इस सजा को पलटते हुए कई अहम बातें कहीं। कोर्ट ने पाया कि जिस मंजूरी (Sanction) के आधार पर केस चलाया गया, वह कानूनी रूप से गलत थी क्योंकि मंजूरी देने वाले अधिकारी के पास पूरा रिकॉर्ड नहीं था। साथ ही, कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि जब वकील हड़ताल पर थे, तब भी ट्रायल कोर्ट ने जल्दबाजी में डिफेंस की गवाही बंद कर दी। मेजर जनरल कपूर के 9 गवाहों में से सिर्फ 4 की ही गवाही हो पाई थी।
जस्टिस जसमीत सिंह ने साफ किया कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत निष्पक्ष सुनवाई (Fair Trial) हर नागरिक का अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि कानूनी समय सीमा का पालन करना जरूरी है, लेकिन यह किसी व्यक्ति के निष्पक्ष सुनवाई के संवैधानिक अधिकार से बड़ा नहीं हो सकता। मेजर जनरल कपूर की तरफ से वकील विवेक कोहली ने दलीलें पेश की थीं, जबकि सीबीआई की ओर से स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर राजेश कुमार मौजूद थे।