Delhi: 43 साल बाद मर्डर केस में मुकेश कुमार हुए बरी, हाई कोर्ट ने कहा- सबूतों में नहीं थी मजबूती

Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक पुराने मर्डर केस में बड़ा फैसला सुनाते हुए मुकेश कुमार को बरी कर दिया है। यह मामला साल 1983 का था, जिसकी FIR दर्ज हुए 43 साल बीत चुके हैं। कोर्ट ने माना कि सरकारी वकील आरोपों को पूरी तरह साब

Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक पुराने मर्डर केस में बड़ा फैसला सुनाते हुए मुकेश कुमार को बरी कर दिया है। यह मामला साल 1983 का था, जिसकी FIR दर्ज हुए 43 साल बीत चुके हैं। कोर्ट ने माना कि सरकारी वकील आरोपों को पूरी तरह साबित करने में नाकाम रहे, जिसके बाद मुकेश को इस केस से मुक्ति मिली।

यह पूरा मामला लाजपत नगर इलाके का है। 1 दिसंबर 1983 को एक DTC बस (रूट नंबर 431) में चाकूबाजी हुई थी, जिसमें विनोद कुमार की मौत हो गई थी। इस घटना में उषा और अशोक कुमार भी घायल हुए थे। ट्रायल कोर्ट ने 10 अगस्त 2004 को मुकेश कुमार और कुछ अन्य लोगों को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हालांकि, 3 मई 2005 को हाई कोर्ट ने उनकी सजा पर रोक लगा दी थी, लेकिन अंतिम फैसला आने में 22 साल का समय लगा।

जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर dudeja की बेंच ने इस फैसले को सुनाया। कोर्ट ने पाया कि मुकेश कुमार के खिलाफ सबूत काफी कमजोर थे। केस के दौरान यह बात सामने आई थी कि मुकेश ने झगड़े के दौरान ‘मारो साले को’ जैसा शब्द कहा था। हाई कोर्ट ने साफ किया कि ऐसी बात कहने का मतलब हमेशा जान से मारना नहीं होता, इसका मतलब चोट पहुँचाना भी हो सकता है। कोर्ट के मुताबिक सिर्फ उकसाने की बात को मर्डर का ठोस सबूत नहीं माना जा सकता।

इसके अलावा, कोर्ट ने गवाहों के बयानों में काफी अंतर पाया और पहचान परेड (TIP) की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि यह साबित नहीं हो पाया कि मुकेश कुमार का इस मर्डर में कोई ‘साझा इरादा’ (Common Intention) था। इस मामले में बलविंदर सिंह पर विनोद कुमार को चाकू मारने का आरोप था। मुकेश कुमार की तरफ से एडवोकेट हिमांशु आनंद गुप्ता और उनकी टीम ने पैरवी की, जबकि राज्य की तरफ से एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर अमन उस्मान ने पक्ष रखा।