Delhi: दिल्ली हाईकोर्ट ने साल 2012 के एक पुराने हेरोइन बरामदगी मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने दोषी ठहराए गए सुनील शर्मा को बरी कर दिया है, जिसे कमर्शियल मात्रा में नशीले पदार्थ रखने के आरोप में 10 साल की सजा मि
Delhi: दिल्ली हाईकोर्ट ने साल 2012 के एक पुराने हेरोइन बरामदगी मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने दोषी ठहराए गए सुनील शर्मा को बरी कर दिया है, जिसे कमर्शियल मात्रा में नशीले पदार्थ रखने के आरोप में 10 साल की सजा मिली थी। अदालत ने इस पूरे मामले में राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) के अधिकारियों की भारी लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जताई है।
सुनील शर्मा को कोर्ट ने क्यों किया बरी?
यह मामला मई 2012 का है जब सिंघु बॉर्डर के पास से हेरोइन बरामद हुई थी। सुनील शर्मा को फरवरी 2016 में दोषी पाया गया था और मार्च 2016 में उसे 10 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी। दिल्ली हाईकोर्ट ने NDPS Act की धारा 21(c) के तहत उसकी सजा को रद्द कर दिया क्योंकि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर पाया कि जब्त किया गया सामान सुरक्षित तरीके से रखा गया था।
DRI अधिकारियों की लापरवाही पर क्या बोले जस्टिस चंद्रशेखरन सुधा?
जस्टिस चंद्रशेखरन सुधा ने कहा कि हेरोइन एक बहुत खतरनाक नशीला पदार्थ है जो पूरी पीढ़ियों को तबाह कर सकता है। उन्होंने टिप्पणी की कि DRI के अधिकारियों ने इस गंभीर मामले को वह महत्व नहीं दिया जिसका यह हकदार था। कोर्ट ने पाया कि अधिकारियों के लापरवाह रवैये और घोर लापरवाही की वजह से ही आरोपी को इस मामले में फायदा मिला और वह बरी हुआ।
मामले में कौन सी कानूनी कमियां पाई गईं?
अदालत ने पाया कि जब्त किए गए प्रतिबंधित सामान की कस्टडी की चेन टूटी हुई थी। NDPS Act की धारा 52A और नशीले पदार्थों के भंडारण से जुड़े स्थायी आदेश 1/89 का पालन नहीं किया गया था। कोर्ट ने यह भी दर्ज किया कि अधिकारियों के मौखिक बयानों के अलावा ऐसा कोई कागजी सबूत नहीं था, जिससे यह पता चले कि जब्त नमूने तुरंत किसी अधिकृत अधिकारी को सौंपे गए थे।
Frequently Asked Questions (FAQs)
सुनील शर्मा को कितनी सजा सुनाई गई थी और अब क्या हुआ?
सुनील शर्मा को मार्च 2016 में 10 साल की सजा सुनाई गई थी, लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट ने DRI की लापरवाही और प्रक्रियात्मक कमियों के कारण उसे बरी कर दिया है।
कोर्ट ने DRI अधिकारियों की आलोचना क्यों की?
कोर्ट ने पाया कि अधिकारियों ने जब्त हेरोइन के रखरखाव और दस्तावेजी सबूतों में घोर लापरवाही बरती, जिससे केस कमजोर हो गया और आरोपी को इसका लाभ मिला।