Delhi High Court ने 2006 के अपहरण और दुष्कर्म मामले में व्यक्ति को किया बरी, सबूतों की कमी आई सामने

Delhi: दिल्ली हाईकोर्ट ने साल 2006 के एक पुराने अपहरण और दुष्कर्म मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने दोषी ठहराए गए व्यक्ति को बरी कर दिया है। जस्टिस विमल कुमार यादव ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी का अपराध संदेह से पर

Delhi: दिल्ली हाईकोर्ट ने साल 2006 के एक पुराने अपहरण और दुष्कर्म मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने दोषी ठहराए गए व्यक्ति को बरी कर दिया है। जस्टिस विमल कुमार यादव ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी का अपराध संदेह से परे साबित नहीं कर पाया, इसलिए उसे संदेह का लाभ दिया गया है।

इस मामले में निचली अदालत ने साल 2008 में आरोपी राम चंदर को दोषी पाया था। उस समय उसे दुष्कर्म के लिए सात साल के कठोर कारावास और अपहरण के लिए एक साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई गई थी। यह मामला 2006 का था जिसमें एक 13 साल की लड़की के साथ कथित तौर पर यह घटना हुई थी।

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि गवाहों के बयानों में काफी विरोधाभास था और फॉरेंसिक सबूत भी कमजोर थे। कोर्ट ने पीड़िता के व्यवहार और उम्र पर भी गौर किया। ओसिफिकेशन टेस्ट की रिपोर्ट में उम्र को लेकर दो साल का अंतर हो सकता था, जिससे यह संभावना जताई गई कि घटना के समय लड़की की उम्र 18.4 साल रही होगी। इससे अपहरण के आरोप पर असर पड़ा।

अदालत में पीड़िता ने खुद यह बयान दिया कि वह अपनी मर्जी से आरोपी के साथ गई थी और वह अब उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं चाहती। इन सभी तथ्यों और सबूतों की कमी को देखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने आरोपी की अपील स्वीकार की और उसे बरी कर दिया।