Delhi: दिल्ली की जेलों में जमानत मिलने के बाद भी कैदियों को रिहा करने में होने वाली देरी पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने पाया कि कई बार जमानत मिलने के हफ्तों बाद तक कैदी जेल में ही बंद रहते थे क्योंकि उनके दस
Delhi: दिल्ली की जेलों में जमानत मिलने के बाद भी कैदियों को रिहा करने में होने वाली देरी पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने पाया कि कई बार जमानत मिलने के हफ्तों बाद तक कैदी जेल में ही बंद रहते थे क्योंकि उनके दस्तावेजों की जांच में समय लगता था। अब इस समस्या को खत्म करने के लिए कोर्ट ने आधार QR कोड के जरिए वेरिफिकेशन करने का निर्देश दिया है ताकि रिहाई की प्रक्रिया तेज हो सके।
Aadhaar QR कोड से कैसे होगी जांच और क्या है नया नियम?
दिल्ली हाईकोर्ट ने सभी जेल अधीक्षकों को आदेश दिया है कि वे जमानतदारों और उनके दस्तावेजों की जांच के लिए Aadhaar QR कोड का इस्तेमाल करें। इसके लिए mAadhaar App, Aadhaar QR Scanner App और Aadhaar App जैसे डिजिटल टूल्स का उपयोग किया जाएगा। वहीं, अगर जमानत के तौर पर फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) या कोई अन्य वित्तीय दस्तावेज जमा किए गए हैं, तो उनकी जांच बैंकों के साथ ईमेल के जरिए की जाएगी ताकि काम जल्दी हो सके।
रिहाई में कितना समय लग रहा था और कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट में यह बात सामने आई कि वेरिफिकेशन की वजह से कैदियों की रिहाई में औसतन एक से दो हफ्ते का समय लगता था, जबकि कुछ मामलों में तो यह देरी 33 से 56 दिनों तक पहुंच गई थी। जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस अमित महाजन की बेंच ने कहा कि जमानत मिलने के बाद भी लंबे समय तक कैदियों को अंदर रखना जमानत देने के मकसद को ही खत्म कर देता है। दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को बताया कि बैंकों से ईमेल के जरिए वेरिफिकेशन अब पहले के मुकाबले काफी तेज हो गया है।
UIDAI से क्या जानकारी मांगी गई है?
कोर्ट ने UIDAI से एक हलफनामा मांगा है जिसमें यह बताया जाए कि गृह मंत्रालय को दी गई आधार वेरिफिकेशन की मंजूरी को देश की सभी जेलों में कैसे लागू किया जा रहा है। साथ ही, पंजाब-हरियाणा और कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेशों के बाद ट्रायल कोर्ट में आधार वेरिफिकेशन की क्या स्थिति है, इसकी भी जानकारी मांगी गई है। इस मामले की अगली सुनवाई 14 अगस्त को होगी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
जमानत के बाद रिहाई में देरी क्यों हो रही थी?
जेल अधिकारियों द्वारा जमानतदारों के दस्तावेजों और पहचान के वेरिफिकेशन में काफी समय लगता था, जिससे रिहाई में 14 दिन से लेकर 56 दिनों तक की देरी हो रही थी।
अब वेरिफिकेशन के लिए किन ऐप्स का इस्तेमाल होगा?
जेल प्रशासन अब mAadhaar App, Aadhaar QR Scanner App और Aadhaar App के जरिए आधार QR कोड स्कैन करके तुरंत वेरिफिकेशन कर सकेगा।