Delhi: राजधानी दिल्ली में इस समय लोग भीषण गर्मी और पानी की भारी कमी से जूझ रहे हैं। IMD ने 28 मई, 2026 तक हीटवेव के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है, जिससे तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक जा सकता है। पानी की मांग
Delhi: राजधानी दिल्ली में इस समय लोग भीषण गर्मी और पानी की भारी कमी से जूझ रहे हैं। IMD ने 28 मई, 2026 तक हीटवेव के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है, जिससे तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक जा सकता है। पानी की मांग और सप्लाई के बीच बड़ा अंतर होने के कारण लोग अब प्राइवेट टैंकरों के भरोसे हैं।
पानी की किल्लत और लोगों का हाल क्या है?
दिल्ली में पानी की मांग 1,250 MGD तक पहुंच गई है, लेकिन सप्लाई सिर्फ 1,000 MGD ही हो पा रही है। वसंत विहार, द्वारका और उत्तरी दिल्ली जैसे इलाकों में पानी का दबाव बहुत कम है। दिलशाद गार्डन में लोगों ने दिल्ली जल बोर्ड के दफ्तर के बाहर विरोध प्रदर्शन भी किया। यमुना में अमोनिया बढ़ने और हरियाणा से कम पानी मिलने की वजह से वजीराबाद और चंद्रावल प्लांट प्रभावित हुए हैं।
Delhi Jal Board ने नियमों में क्या बदलाव किए हैं?
दिल्ली जल बोर्ड (DJB) ने इंफ्रास्ट्रक्चर चार्जेस (IFC) के नियमों में बदलाव किया है। अब यह चार्ज प्रॉपर्टी के साइज के बजाय पानी की असली मांग के हिसाब से लिया जाएगा। ई और एफ कैटेगरी की कॉलोनियों को 50% और जी और एच कैटेगरी वालों को 70% तक की छूट मिलेगी। इसके अलावा, जिन व्यावसायिक भवनों में अपना STP प्लांट चालू है, उन्हें सीवर IFC में 50% की राहत मिलेगी, लेकिन प्लांट बंद मिलने पर जुर्माना देना होगा।
गर्मी का असर और सरकार के अगले कदम क्या हैं?
भीषण लू के कारण अस्पतालों में हीटस्ट्रोक के मामले बढ़ रहे हैं, 23 मई को ही 15 से 25 लोग भर्ती हुए। स्थिति को सुधारने के लिए नजफगढ़ में 860 करोड़ रुपये की लागत से 12 नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जाएंगे। साथ ही केशोपुर STP की क्षमता बढ़ाई जाएगी और शाहदरा के रोहतास नगर में नए अंडरग्राउंड रिजर्वायर बनाए जाएंगे। फिलहाल जल बोर्ड 1,000 टैंकरों के जरिए दिनभर में 6,500 चक्कर लगाकर पानी पहुंचा रहा है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
दिल्ली में हीटवेव का अलर्ट कब तक है?
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने दिल्ली में 28 मई, 2026 तक हीटवेव के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है, जिसमें तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना है।
पानी के इंफ्रास्ट्रक्चर चार्जेस (IFC) में क्या बदलाव हुआ है?
अब IFC प्रॉपर्टी के आकार के बजाय पानी की वास्तविक मांग के आधार पर लिया जाएगा। अलग-अलग कैटेगरी की कॉलोनियों को 50% से 70% तक की छूट दी गई है।