Delhi: राजधानी दिल्ली में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार जाने से स्लम इलाकों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं की मुश्किलें बढ़ गई हैं। तंग बस्तियों और भीषण गर्मी की वजह से इन महिलाओं को चक्कर आना, नींद न आना और हाई ब्लड प
Delhi: राजधानी दिल्ली में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार जाने से स्लम इलाकों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं की मुश्किलें बढ़ गई हैं। तंग बस्तियों और भीषण गर्मी की वजह से इन महिलाओं को चक्कर आना, नींद न आना और हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह स्थिति माँ और होने वाले बच्चे दोनों के लिए खतरनाक हो सकती है।
गर्भवती महिलाओं पर गर्मी का क्या असर हो रहा है?
दिल्ली की झुग्गियों में रहने वाली महिलाओं को इस समय गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अत्यधिक गर्मी के कारण उन्हें घबराहट, सांस लेने में तकलीफ और सिरदर्द की शिकायत हो रही है। डॉक्टरों का कहना है कि ज्यादा गर्मी शरीर के प्राकृतिक कूलिंग सिस्टम को बिगाड़ देती है, जिससे हीट स्ट्रोक और हीट एग्जॉशन का खतरा बढ़ जाता है। WHO और अन्य विशेषज्ञों के अनुसार, इससे समय से पहले डिलीवरी (Preterm birth) और जन्म दोष जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।
गर्मी से बचाव के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?
दिल्ली सरकार ने गर्मी से निपटने के लिए ‘Delhi Heat Action Plan 2025’ लागू किया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हीटवेव को एक घातक संकट बताया है। इस योजना के तहत कई कदम उठाए जा रहे हैं:
- सरकारी अस्पतालों में हीटवेव वार्ड बनाए जा रहे हैं।
- शहर में 3,000 वाटर कूलर लगाए जा रहे हैं।
- स्लम इलाकों में टिन और एस्बेस्टस की छतों पर सफेद पेंट या बोरियों का इस्तेमाल कर ‘Cool Roof’ प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है।
- हीटवेव अलर्ट भेजने के लिए SMS और मीडिया का सहारा लिया जा रहा है।
- 1,800 ‘आपदा मित्र’ वॉलंटियर्स की तैनाती की जा रही है।
स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य सुविधाओं की क्या स्थिति है?
एक सरकारी सर्वे में यह बात सामने आई कि दिल्ली के केवल 19% स्वास्थ्य केंद्र ही गर्मी से जुड़ी बीमारियों के लिए तैयार हैं। वहीं, Mahila Housing Trust (MHT) जैसी संस्थाएं अब गरीब समुदायों के लिए ‘पैरामीट्रिक हीट इंश्योरेंस’ लाई हैं, ताकि इलाज और आय के नुकसान की भरपाई हो सके। एक्सपर्ट्स का मानना है कि केवल कागजी योजना काफी नहीं है, बल्कि जमीन पर कूलिंग समाधान और बेहतर वेंटिलेशन पहुंचाना जरूरी है ताकि गरीब बस्तियों में रहने वाले लोग सुरक्षित रह सकें।