Delhi में गर्मी का कहर, Greenpeace India की पहल से सामने आया हीटवेव का असर; NGT ने सरकार से मांगी कार्ययोजना

Delhi: राजधानी दिल्ली में भीषण गर्मी और हीटवेव का असर अब आम लोगों की जिंदगी पर साफ दिखने लगा है। मौसम विभाग के आंकड़ों से अलग, ग्रीनपीस इंडिया ने ‘गर्मी का हिसाब-किताब’ नाम से एक खास मुहिम शुरू की है। इस पहल

Delhi: राजधानी दिल्ली में भीषण गर्मी और हीटवेव का असर अब आम लोगों की जिंदगी पर साफ दिखने लगा है। मौसम विभाग के आंकड़ों से अलग, ग्रीनपीस इंडिया ने ‘गर्मी का हिसाब-किताब’ नाम से एक खास मुहिम शुरू की है। इस पहल के जरिए दिल्ली के सबसे गर्म इलाकों में रहने वाले लोग खुद बता रहे हैं कि यह तपिश उनकी सेहत और रोजमर्रा की जिंदगी को कैसे प्रभावित कर रही है।

इस रिपोर्ट में 25 साल की पूजा के परिवार का जिक्र है, जो एक छोटे से कमरे के घर में रहते हैं। घर में खाना पकाने से तापमान और बढ़ जाता है, जिससे उनके पिता की तबीयत खराब हो गई। डॉ. कक्कड़ के अनुसार, ज्यादा गर्मी में रहने से शरीर में स्ट्रेस हार्मोन बढ़ते हैं, जिससे दिल और गुर्दे की बीमारियां बढ़ सकती हैं। साथ ही, इससे नींद की कमी, चिंता और सोचने की क्षमता पर भी बुरा असर पड़ता है।

दूसरी तरफ, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने इस बढ़ती गर्मी और हीटवेव संकट पर खुद संज्ञान लिया है। NGT का मानना है कि बढ़ता तापमान स्वास्थ्य, खेती, पानी की उपलब्धता और अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा है। ट्रिब्यूनल ने सरकार से क्षेत्रवार जलवायु अनुकूलन रणनीति और तापमान की मैपिंग के लिए एक ठोस कार्ययोजना मांगी है। इस मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त 2026 को होगी।

ग्रीनपीस इंडिया ने इस मुद्दे पर कई अन्य कदम भी उठाए हैं। संस्था ने स्ट्रीट वेंडरों पर पड़ने वाले असर को समझने के लिए ‘हीटवेव हैवक’ रिपोर्ट जारी की, जिसमें 700 से ज्यादा रेहड़ी-पटरी वालों के अनुभव शामिल हैं। इसके अलावा, सुंदर नगरी और उत्तर-पूर्वी दिल्ली जैसे इलाकों में ‘कम्युनिटी हीट मैपिंग’ की गई ताकि गर्मी के हॉटस्पॉट की पहचान हो सके। संस्था ने IMD के साथ मिलकर दिल्ली के 15 बाजारों में चेतावनी संकेत भी लगाए हैं।

आंकड़ों की बात करें तो साल 2024 में भारत में 40,000 से ज्यादा संदिग्ध हीटस्ट्रोक के मामले आए। दिल्ली में जून से अगस्त के बीच ‘अज्ञात मौतों’ का आंकड़ा 2019 के 5,341 से बढ़कर 2022-24 में 11,819 तक पहुंच गया है, जिसका सीधा संबंध उमस और गर्मी से बताया गया है। ग्रीनपीस इंडिया लगातार मांग कर रहा है कि सरकार हीटवेव को राष्ट्रीय आपदा घोषित करे ताकि इसके बचाव के लिए पर्याप्त फंड और नीतियां बन सकें।