Delhi: दिल्ली हाईकोर्ट में एक बेहद संवेदनशील और अनोखा मामला सामने आया है। एक महिला ने अदालत से अपने कोमा में पड़े पति के स्पर्म को सुरक्षित रखने की इजाजत मांगी है। महिला का पति मार्च 2025 से अस्पताल में लाइफ सपोर्ट पर है
Delhi: दिल्ली हाईकोर्ट में एक बेहद संवेदनशील और अनोखा मामला सामने आया है। एक महिला ने अदालत से अपने कोमा में पड़े पति के स्पर्म को सुरक्षित रखने की इजाजत मांगी है। महिला का पति मार्च 2025 से अस्पताल में लाइफ सपोर्ट पर है और उसकी हालत बहुत नाजुक बनी हुई है। कानून के पेंच और पति की गंभीर स्थिति के बीच महिला ने मां बनने की उम्मीद में यह कदम उठाया है ताकि वह भविष्य में अपने पति की संतान को जन्म दे सके।
कानूनी अड़चन और पति की मेडिकल स्थिति क्या है?
महिला के वकील Adv. Arjit Gaur ने कोर्ट को जानकारी दी कि पति पिछले एक साल से ज्यादा समय से ICU में भर्ती है। मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार वह 100 प्रतिशत विकलांग है और अपनी सहमति देने की स्थिति में नहीं है। भारतीय कानून के Assisted Reproductive Technology (Regulation) Act, 2021 के तहत किसी भी ऐसी प्रक्रिया के लिए पति और पत्नी दोनों की लिखित सहमति अनिवार्य होती है। पति के कोमा में होने के कारण यह सहमति मिलना फिलहाल असंभव है, इसीलिए महिला ने हाईकोर्ट से विशेष अनुमति की मांग की है।
मेडिकल एक्सपर्ट की क्या सलाह है और आगे क्या होगा?
- इस मामले में एक्सपर्ट्स का कहना है कि सुई के जरिए स्पर्म निकालने की प्रक्रिया मुमकिन है।
- IVF एक्सपर्ट Dr. Shivani Sachdev के अनुसार इस तकनीक को Surgical Sperm Retrieval कहा जाता है और स्पर्म को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
- याचिका में एक मेडिकल कमेटी बनाने का भी सुझाव दिया गया है ताकि पति की सेहत और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जा सके।
- दिल्ली हाईकोर्ट ने फिलहाल इस अर्जी पर गौर करते हुए अगली सुनवाई के लिए समय दिया है।
वकील ने कोर्ट में दलील दी है कि समय बीतने के साथ स्पर्म की क्वालिटी खराब हो सकती है, इसलिए इस मामले में जल्द फैसला लेना जरूरी है। केंद्र सरकार भी इस मामले की बारीकी से जांच कर रही है क्योंकि इसका असर भविष्य में कानून की व्याख्या पर पड़ सकता है। यह मामला उन पुराने केसों से अलग है जिनमें इंसान की मौत के बाद स्पर्म निकालने की अनुमति मांगी गई थी।