Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने ‘सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0’ योजना के तहत सप्लीमेंट्री न्यूट्रिशन की सप्लाई और वितरण के लिए NGO चुनने की प्रक्रिया को सही ठहराया है। कोर्ट ने उन कई याचिकाओं को खारिज कर दिया है जिन
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने ‘सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0’ योजना के तहत सप्लीमेंट्री न्यूट्रिशन की सप्लाई और वितरण के लिए NGO चुनने की प्रक्रिया को सही ठहराया है। कोर्ट ने उन कई याचिकाओं को खारिज कर दिया है जिनमें चयन प्रक्रिया को गलत बताया गया था। यह मामला महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा 20 फरवरी 2023 को जारी की गई फाइनल लिस्ट से जुड़ा था।
कोर्ट ने चयन प्रक्रिया पर क्या कहा?
जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की बेंच ने साफ किया कि कोर्ट टेंडर से जुड़े प्रशासनिक फैसलों में तब तक दखल नहीं देता जब तक कि कोई बड़ी गड़बड़ी या गलत इरादा सामने न आए। कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता यह साबित नहीं कर पाए कि चयन प्रक्रिया में कोई कानूनी गलती या अनियमितता थी। कोर्ट के मुताबिक, प्रशासनिक फैसलों की मेरिट के बजाय उसकी प्रक्रिया की जांच की जाती है।
प्रेजेंटेशन राउंड को क्यों माना सही?
कुछ NGO ने चयन प्रक्रिया में प्रेजेंटेशन स्टेज को शामिल करने पर आपत्ति जताई थी, जिसमें 70 नंबर टेक्निकल इवैल्यूएशन और 30 नंबर प्रेजेंटेशन के थे। कोर्ट ने इस पर कहा कि इतने बड़े स्तर की जन कल्याणकारी योजना के लिए सिर्फ कागजी दस्तावेजों पर भरोसा नहीं किया जा सकता। NGO की क्षमता, बुनियादी ढांचे और काम करने के तरीके को परखने के लिए प्रेजेंटेशन लेना एक सही तरीका है और इसे सभी के लिए एक समान रखा गया था।
क्या है सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 योजना?
- यह योजना बच्चों (0-6 साल), किशोरियों (14-18 साल), गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं में कुपोषण कम करने के लिए है।
- इसका लक्ष्य आंगनवाड़ी के ढांचे को सुधारना और पोषण अभियान को मजबूत करना है।
- इस योजना में पूरक पोषण, प्री-स्कूल शिक्षा, स्वास्थ्य जांच और टीकाकरण जैसी छह मुख्य सेवाएं दी जाती हैं।
- यह प्रोग्राम 15वें वित्त आयोग की अवधि (2021-22 से 2025-26) के दौरान लागू किया जा रहा है।