Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक 3 साल की बच्ची के इलाज के लिए केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। बच्ची एक बहुत ही दुर्लभ बीमारी LRBA Deficiency से जूझ रही है और उसके बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए करीब 40 लाख रुपये की जरूरत है।
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक 3 साल की बच्ची के इलाज के लिए केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। बच्ची एक बहुत ही दुर्लभ बीमारी LRBA Deficiency से जूझ रही है और उसके बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए करीब 40 लाख रुपये की जरूरत है। जस्टिस अमित शर्मा ने इस मामले की सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है।
बच्ची की बीमारी और इलाज की क्या है स्थिति
बच्ची का नाम संस्कृति भगत है। जुलाई 2025 में हुए टेस्ट में उसे LRBA Deficiency नाम की दुर्लभ बीमारी का पता चला था। चेन्नई के Apollo Hospital के डॉक्टरों ने बताया कि बोन मैरो ट्रांसप्लांट ही इसका एकमात्र इलाज है। इसमें बच्ची के पिता को डोनर बनाया जाएगा। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि अगर इलाज में और देरी हुई तो बच्ची की जान को खतरा हो सकता है।
सरकारी नियमों और कोर्ट में क्या दलील दी गई
कोर्ट में याचिकाकर्ता के वकील अशोक अग्रवाल ने कहा कि नेशनल पॉलिसी फॉर रेयर डिजीज 2021 के तहत ऐसी बीमारियों के मरीजों को सरकारी मदद मिलनी चाहिए। सरकार ने मई 2022 में इस मदद की राशि 20 लाख से बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दी थी। याचिका में कहा गया कि जब सरकारी अस्पताल जैसे AIIMS Delhi में यह इलाज उपलब्ध नहीं है, तो सरकार को प्राइवेट अस्पताल में इलाज का खर्च उठाना चाहिए।
अब आगे क्या होगा
दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिए हैं कि वह इस मामले में अपनी रिपोर्ट पेश करे। 5 जून 2026 को हुई सुनवाई के बाद अब अगली सुनवाई 8 जून 2026 को होगी। कोर्ट यह देखना चाहता है कि क्या बच्ची को समय पर वित्तीय सहायता मिल सकती है ताकि उसकी जान बचाई जा सके।
Frequently Asked Questions (FAQs)
बच्ची को कौन सी बीमारी है और इलाज का खर्च कितना है?
बच्ची LRBA Deficiency नाम की एक दुर्लभ जेनेटिक बीमारी से पीड़ित है। इसके बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए चेन्नई के अपोलो अस्पताल ने करीब 40 लाख रुपये का अनुमान लगाया है।
दुर्लभ बीमारियों के लिए सरकारी पॉलिसी क्या कहती है?
नेशनल पॉलिसी फॉर रेयर डिजीज 2021 के अनुसार, दुर्लभ बीमारियों के मरीजों को वित्तीय सहायता दी जाती है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने मई 2022 में इस सहायता राशि को बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दिया था।