Delhi HC ने लंदन बैडमिंटन टूर्नामेंट के फर्जी पोस्ट पर सुरक्षित रखा फैसला, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से कंटेंट हटाने के दिए निर्देश

Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने सोशल मीडिया पर फैल रही उन फर्जी खबरों पर कड़ा रुख अपनाया है, जिनमें दावा किया गया था कि भारत के न्यायाधीश और केंद्रीय मंत्री लंदन में एक बैडमिंटन टूर्नामेंट में हिस्सा ले रहे थे। बैडमिंटन एसोसि

Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने सोशल मीडिया पर फैल रही उन फर्जी खबरों पर कड़ा रुख अपनाया है, जिनमें दावा किया गया था कि भारत के न्यायाधीश और केंद्रीय मंत्री लंदन में एक बैडमिंटन टूर्नामेंट में हिस्सा ले रहे थे। बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (BAI) की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस तेजस करिया ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि ऐसी सभी भ्रामक पोस्ट को तुरंत हटाया जाए।

कोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और डिजिटल कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे इन फर्जी पोस्ट को डालने वाले अकाउंट्स की जानकारी सरकार को सौंपें। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) को इस मामले की जांच करने और कानून के हिसाब से कार्रवाई करने को कहा गया है। यह पूरा विवाद उन पोस्ट्स से शुरू हुआ जिनमें कहा गया था कि करीब 75 भारतीय जज और मंत्री टैक्स के पैसों पर लंदन में बैडमिंटन खेलने गए थे।

भारत सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि ये दावे पूरी तरह गलत और भ्रामक हैं। उन्होंने साफ किया कि जिन तस्वीरों का इस्तेमाल लंदन इवेंट बताने के लिए किया गया, वे असल में नवंबर 2025 में दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम में हुए नेशनल लेवल बैडमिंटन टूर्नामेंट की थीं। सरकार की फैक्ट चेकिंग यूनिट PIB Fact Check ने भी पहले ही इन खबरों को फर्जी बता दिया था।

कानून मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि जिस तारीख को लंदन टूर्नामेंट का दावा किया गया, उस दिन केंद्रीय कानून मंत्री भारत में ही थे। वहीं चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया लंदन आधिकारिक मुलाकात और आर्बिट्रेशन कानून से जुड़े कार्यक्रमों में शामिल होने गए थे, न कि किसी बैडमिंटन टूर्नामेंट के लिए। BAI ने कोर्ट में दलील दी कि ऐसी साजिशों से न्यायपालिका की छवि खराब होती है और खेल का मजाक उड़ता है।