Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने तेलुगु एक्टर Naga Chaitanya के व्यक्तित्व अधिकारों (Personality Rights) की सुरक्षा के लिए एक बड़ा आदेश दिया है। जस्टिस ज्योति सिंह ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए किसी भी तीसरे पक्ष को एक्टर की सह
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने तेलुगु एक्टर Naga Chaitanya के व्यक्तित्व अधिकारों (Personality Rights) की सुरक्षा के लिए एक बड़ा आदेश दिया है। जस्टिस ज्योति सिंह ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए किसी भी तीसरे पक्ष को एक्टर की सहमति के बिना उनके नाम और फोटो वाले सामान बेचने से रोक दिया है। कोर्ट ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से आपत्तिजनक कंटेंट हटाने के भी निर्देश दिए हैं।
कोर्ट ने क्या आदेश दिया और क्यों
जस्टिस ज्योति सिंह ने कहा कि Naga Chaitanya एक मशहूर हस्ती हैं और उनकी पहचान, आवाज और चेहरे की अपनी एक वैल्यू है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि कोई भी व्यक्ति या कंपनी उनकी अनुमति के बिना उनके नाम या फोटो का व्यावसायिक इस्तेमाल नहीं कर सकती। साथ ही, AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), डीपफेक और फेस मोर्फिंग जैसी तकनीक के जरिए उनके चेहरे का गलत इस्तेमाल करने पर भी पाबंदी लगा दी गई है।
ऑनलाइन कंटेंट और AI के गलत इस्तेमाल पर सख्ती
कोर्ट ने उन सभी वेबसाइटों और यूट्यूब चैनलों को निर्देश दिया है जो पोर्नोग्राफिक या मानहानि करने वाला कंटेंट फैला रहे हैं। आदेश के मुताबिक, ऐसे आपत्तिजनक कंटेंट को नोटिस मिलने के 24 घंटे के भीतर हटाना होगा। एक्टर की कानूनी टीम ने ‘डायनामिक इंजंक्शन’ की मांग की है ताकि भविष्य में आने वाले नए फर्जी लिंक और कंटेंट को भी तुरंत हटाया जा सके।
किसे मिलेगी इससे राहत और क्या है कानूनी आधार
यह मामला कॉपीराइट एक्ट के तहत कलाकारों के अधिकारों और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा है। इससे पहले ऐश्वर्या राय बच्चन, सलमान खान और नागार्जुन अक्किनेनी जैसे बड़े सितारों ने भी अपने अधिकारों की सुरक्षा के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। कोर्ट का मानना है कि मशहूर हस्तियों को अपनी छवि को गलत इस्तेमाल और धोखाधड़ी से बचाने का पूरा हक है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
पर्सनैलिटी राइट्स (Personality Rights) क्या होते हैं?
इसका मतलब है कि किसी मशहूर व्यक्ति को अपनी नाम, फोटो, आवाज और पहचान को नियंत्रित करने का कानूनी अधिकार है, ताकि कोई दूसरा उनकी मर्जी के बिना इसे पैसे कमाने या गलत काम के लिए इस्तेमाल न कर सके।
कोर्ट ने AI और डीपफेक के बारे में क्या कहा है?
कोर्ट ने साफ किया है कि Generative AI, मशीन लर्निंग और डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल करके एक्टर की फर्जी फोटो या वीडियो बनाना और उन्हें फैलाना गैरकानूनी है।