Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) को अपनी एक विवादित प्रेस रिलीज बिना किसी शर्त के वापस लेने का आदेश दिया। यह प्रेस रिलीज 26 अप्रैल 2025 को जारी की गई थी, जिसमें FIITJEE और उसके नि
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) को अपनी एक विवादित प्रेस रिलीज बिना किसी शर्त के वापस लेने का आदेश दिया। यह प्रेस रिलीज 26 अप्रैल 2025 को जारी की गई थी, जिसमें FIITJEE और उसके निदेशकों के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए थे। कोर्ट ने 2 जून 2026 को इस वापसी को आधिकारिक तौर पर रिकॉर्ड कर लिया।
ED ने प्रेस रिलीज क्यों वापस ली?
कोर्ट ने पाया कि ED की प्रेस रिलीज में ‘निर्णायक टिप्पणियां’ (judgmental aspersions) की गई थीं। यह गृह मंत्रालय द्वारा 2010 में जारी एक ऑफिस मेमोरेंडम का उल्लंघन था। इस नियम के मुताबिक, जांच एजेंसियां चल रहे मामलों में मीडिया के सामने अपनी निजी राय या फैसले नहीं सुना सकती हैं। जस्टिस पुरुषइंद्र कुमार कौरव ने स्पष्ट किया कि कोर्ट अपराध की गंभीरता पर नहीं, बल्कि गृह मंत्रालय के नियमों के पालन पर विचार कर रहा था।
मामले की मुख्य बातें क्या रहीं?
- विवाद की शुरुआत: ED ने 26 अप्रैल 2025 को एक प्रेस रिलीज जारी की थी जिसमें FIITJEE पर बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी और 206 करोड़ रुपये की रिकवरी का दावा किया गया था।
- कोर्ट का रुख: 18 मार्च 2026 को कोर्ट ने शुरुआती समीक्षा में इसे गलत पाया और 6 मई 2026 को इसे हटाने का निर्देश दिया।
- कानूनी प्रतिनिधित्व: FIITJEE की तरफ से Kochhar & Co. (India) ने पैरवी की और इस याचिका को सफल बनाया।
अब आगे क्या होगा?
ED के वकील ने अदालत को बताया कि विभाग इस प्रेस रिलीज को वापस लेने के लिए जरूरी कदम उठाएगा। चूंकि ED ने दस्तावेज़ वापस लेने की प्रतिबद्धता जताई, इसलिए 6 मई 2026 को ही कोर्ट ने कार्यवाही बंद कर दी और FIITJEE की याचिका का निपटारा कर दिया। अब इस मामले में उस विवादित प्रेस रिलीज का कोई कानूनी आधार नहीं रहा।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ED की प्रेस रिलीज में क्या आरोप लगाए गए थे?
ED ने अपनी 26 अप्रैल 2025 की प्रेस रिलीज में FIITJEE पर बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया था और दावा किया था कि अपराध की कमाई के रूप में 206 करोड़ रुपये बरामद किए गए हैं।
कोर्ट ने इसे हटाने का आदेश क्यों दिया?
कोर्ट ने माना कि प्रेस रिलीज गृह मंत्रालय के 2010 के नियमों का उल्लंघन करती थी, क्योंकि इसमें जांच पूरी होने से पहले ही फैसले सुनाने जैसी भाषा का इस्तेमाल किया गया था।