Delhi HC का बड़ा फैसला, 3 साल की बच्ची के इलाज के लिए AIIMS को दिए निर्देश
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक 3 साल की बच्ची के जीवन को बचाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। कोर्ट ने AIIMS को निर्देश दिया है कि वह बच्ची के ट्रांसप्लांट का इलाज तुरंत शुरू करे। यह फैसला जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने एक रिट य
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक 3 साल की बच्ची के जीवन को बचाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। कोर्ट ने AIIMS को निर्देश दिया है कि वह बच्ची के ट्रांसप्लांट का इलाज तुरंत शुरू करे। यह फैसला जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए सुनाया। बच्ची को एक दुर्लभ जेनेटिक बीमारी LRBA deficiency है, जिससे उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हुई है।
इस मामले में बच्ची के पिता सौरव कुमार ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने अपनी बेटी के बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए केंद्र सरकार से आर्थिक मदद मांगी थी, क्योंकि इस इलाज का खर्च करीब 40 लाख रुपये तक आंका गया था। याचिका की पैरवी एडवोकेट अशोक अग्रवाल और उनकी टीम ने की। पहले इस मामले में अपोलो अस्पताल चेन्नई और दिल्ली से इलाज की सलाह और खर्च का अनुमान लिया गया था।
कोर्ट ने इस बात की जांच के लिए डॉक्टरों की एक एक्सपर्ट कमेटी बनाई थी, ताकि यह पता चल सके कि AIIMS में इस जटिल इलाज की सुविधा है या नहीं। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में साफ किया कि AIIMS के पास ट्रांसप्लांट के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं मौजूद हैं। AIIMS के नोडल ऑफिसर ने भी इसकी पुष्टि की।
दिलचस्प बात यह है कि पहले पीडियाट्रिक्स विभाग के एक सीनियर रेजिडेंट ने कहा था कि अस्पताल में संसाधनों की कमी है, लेकिन एक्सपर्ट कमेटी ने इस दावे को गलत बताया। अब कोर्ट के आदेश के बाद बच्ची, जिसका नाम संस्कृति भगत उर्फ सांची है, को AIIMS में इलाज मिल सकेगा। परिवार ने इस इलाज के लिए नेशनल पॉलिसी फॉर रेयर डिजीज, 2021 के तहत आर्थिक सहायता की मांग की थी।