Delhi के Hauz Khas में अब भी गंदा पानी, लोग पीने के लिए बोतलबंद पानी खरीदने को मजबूर

Delhi: दक्षिण दिल्ली के Hauz Khas और आसपास के इलाकों में पानी के दूषित होने की समस्या अभी खत्म नहीं हुई है। लोग पिछले कई दिनों से नलों से मटमैला और बदबूदार पानी आने की शिकायत कर रहे हैं। हालत यह है कि कई परिवारों ने अब अ

Delhi: दक्षिण दिल्ली के Hauz Khas और आसपास के इलाकों में पानी के दूषित होने की समस्या अभी खत्म नहीं हुई है। लोग पिछले कई दिनों से नलों से मटमैला और बदबूदार पानी आने की शिकायत कर रहे हैं। हालत यह है कि कई परिवारों ने अब अपनी सेहत बचाने के लिए बोतलबंद पानी का इस्तेमाल शुरू कर दिया है और वे लैब टेस्ट की रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।

हौज खास के Z ब्लॉक और आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों का कहना है कि पिछले एक हफ्ते से पानी का रंग बदला हुआ है। यहां की निवासी वेरोनिका फ्रांसिस ने बताया कि सुबह के समय पानी में काले घेरे नजर आते हैं। इसी तरह गुलमोहर पार्क और ग्रीन पार्क जैसे पॉश इलाकों में भी 15 जून के आसपास पानी से बदबू आने की खबरें आई थीं। हालांकि दिल्ली जल बोर्ड ने 11 जून को गुलमोहर पार्क में एक रियल-टाइम वॉटर क्वालिटी एनालाइजर लगाया था, लेकिन हौज खास के लोग अब भी परेशान हैं।

हौज खास के RWA फेडरेशन के चीफ मनोरंजन सिंह ने कहा कि मरम्मत का काम तो चल रहा है, लेकिन समस्या पूरी तरह हल नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि दिल्ली जल बोर्ड अब तक दूषित पानी के असली स्रोत का पता नहीं लगा पाया है और कई घरों में सीवेज मिला हुआ पानी आ रहा है। वहीं, गीता भवन लेन के RWA सचिव गौरव शर्मा के मुताबिक, जब पानी की सप्लाई रुकती है तो खाली पाइपलाइनों में कमजोर पॉइंट्स से गंदा पानी अंदर घुस जाता है, खासकर अगर पास में सीवेज लाइन हो।

TERI की एक्सपर्ट डॉ. फौजिया तरन्नुम ने समझाया कि पानी और सीवेज की पाइपलाइनें अक्सर एक-दूसरे के समानांतर चलती हैं। अगर पानी की लाइन में प्रेशर कम हो या कहीं लीकेज हो, तो सीवेज का पानी उसमें मिल सकता है। दिल्ली जल बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि इस समस्या को प्राथमिकता पर सुलझाया जा रहा है, हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि प्लंबरों द्वारा गलत तरीके से किए गए कनेक्शन की वजह से भी लीकेज और दूषित पानी की समस्या हो सकती है।

इस पूरे मामले में CAG की एक रिपोर्ट ने दिल्ली जल बोर्ड की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। 23 मार्च 2026 को विधानसभा में पेश की गई रिपोर्ट में बताया गया कि 2017-18 से 2021-22 के बीच बोर्ड की लैब में टेस्ट किए गए 55% ग्राउंडवाटर सैंपल पीने लायक नहीं थे। रिपोर्ट में बुनियादी ढांचे की कमी, स्टाफ की कमी और पानी की गुणवत्ता की जांच में लापरवाही की बात कही गई है। CAG ने सुझाव दिया है कि जनसंख्या के हिसाब से नई वॉटर पॉलिसी बनाई जाए और पाइपलाइनों का नियमित रखरखाव किया जाए।