Delhi: केंद्र सरकार ने दिल्ली जिमखाना क्लब (Delhi Gymkhana Club) की लीज खत्म कर उसकी जमीन वापस लेने का फैसला किया है। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने सोमवार को साफ कर दिया कि सरकारी जमीन वापस लेने की यह प्रक्रिया जारी रहेगी
Delhi: केंद्र सरकार ने दिल्ली जिमखाना क्लब (Delhi Gymkhana Club) की लीज खत्म कर उसकी जमीन वापस लेने का फैसला किया है। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने सोमवार को साफ कर दिया कि सरकारी जमीन वापस लेने की यह प्रक्रिया जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि शहर के विकास और जरूरी कामों के लिए जमीन की कमी है, इसलिए ऐसी जमीनों का इस्तेमाल पब्लिक प्रोजेक्ट्स के लिए किया जाएगा।
सरकार ने जमीन वापस लेने का फैसला क्यों किया?
Land and Development Office (L&DO) ने 22 मई 2026 को क्लब को पत्र भेजकर 27.3 एकड़ जमीन खाली करने को कहा था। सरकार का कहना है कि इस जमीन की जरूरत डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने, पब्लिक सिक्योरिटी और अन्य जरूरी सरकारी प्रोजेक्ट्स के लिए है। लीज एग्रीमेंट के क्लॉज 4 के मुताबिक, अगर जमीन किसी सार्वजनिक कार्य के लिए चाहिए, तो सरकार इसे वापस ले सकती है।
कोर्ट में क्या है मामला और क्या कहा सरकार ने?
क्लब के सदस्यों ने इस फैसले के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। केंद्र सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि 5 जून को जबरन कब्जा नहीं किया जाएगा। उन्होंने साफ किया कि यह तारीख केवल स्वेच्छा से खाली करने के लिए थी और आगे की कार्रवाई कानून के हिसाब से नोटिस देकर ही की जाएगी। कोर्ट ने अब इस मामले की अगली सुनवाई जुलाई के अंत तक टाल दी है।
क्लब और वकीलों का क्या तर्क है?
क्लब की तरफ से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी है कि इस नोटिस में किसी खास सार्वजनिक उद्देश्य का जिक्र नहीं है। उनका कहना है कि यह संपत्ति के अधिकार का उल्लंघन है और इस प्रक्रिया में मुआवजे की बात नहीं की गई है। क्लब ने सरकार से दूसरी जगह जमीन देने या इस फैसले को वापस लेने की मांग की है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
दिल्ली जिमखाना क्लब को कितनी जमीन खाली करनी होगी?
क्लब को कुल 27.3 एकड़ जमीन खाली करने का निर्देश दिया गया है, जिसकी लीज 1928 में दी गई थी।
क्या सरकार 5 जून को जबरन कब्जा कर लेगी?
नहीं, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दिल्ली हाई कोर्ट में साफ किया है कि 5 जून को जबरन कब्जा नहीं होगा और कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाएगा।