Delhi Gymkhana Club को खाली करने का नोटिस, सदस्य और कर्मचारी पहुंचे High Court
Delhi: दिल्ली के मशहूर दिल्ली जिमखाना क्लब में जमीन को लेकर विवाद बढ़ गया है। केंद्र सरकार ने क्लब को खाली करने का नोटिस जारी किया है, जिसके खिलाफ अब क्लब के सदस्यों और कर्मचारियों ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया ह
Delhi: दिल्ली के मशहूर दिल्ली जिमखाना क्लब में जमीन को लेकर विवाद बढ़ गया है। केंद्र सरकार ने क्लब को खाली करने का नोटिस जारी किया है, जिसके खिलाफ अब क्लब के सदस्यों और कर्मचारियों ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। यह मामला अब कानूनी लड़ाई में बदल गया है और कोर्ट इस पर सुनवाई करेगा।
पूरा विवाद केंद्र सरकार के आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के तहत आने वाले Land & Development Office (L&DO) से शुरू हुआ। L&DO ने 29 जून 2026 को एक कारण बताओ नोटिस जारी किया। इसमें क्लब से पूछा गया है कि पब्लिक प्रिमिसिस एक्ट, 1971 के तहत बेदखली का आदेश क्यों न जारी किया जाए। सरकार का कहना है कि यह 27.3 एकड़ जमीन रणनीतिक रूप से बहुत जरूरी है और इसका इस्तेमाल डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर, पब्लिक सिक्योरिटी और अन्य सरकारी प्रोजेक्ट्स के लिए किया जाना है।
दूसरी तरफ, क्लब के सदस्यों और स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन ने इस नोटिस को गलत बताया है। उन्होंने हाई कोर्ट में अर्जी दाखिल कर इस नोटिस पर रोक लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि सरकार ने जमीन वापस लेने के लिए जो कारण दिए हैं, वे बहुत धुंधले हैं और यह सिर्फ जबरन बेदखली का एक तरीका है। सदस्यों ने यह भी मुद्दा उठाया कि इस प्रक्रिया में किसी मुआवजे की बात नहीं की गई है, हालांकि सरकार का तर्क है कि वह अपनी ही संपत्ति वापस ले रही है।
इस मामले में समय सीमा काफी सख्त रखी गई है। क्लब और संबंधित पक्षों को 7 जुलाई 2026 तक अपना जवाब जमा करना है और उसी दिन दोपहर 2:30 बजे व्यक्तिगत सुनवाई के लिए पेश होना है। जस्टिस अवनीश झिंगन की बेंच 6 जुलाई 2026 को इन याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। इससे पहले 26 मई 2026 को केंद्र सरकार ने कोर्ट को भरोसा दिया था कि वह 5 जून तक जबरन कब्जा नहीं करेगी और कानूनी प्रक्रिया का पालन करेगी।
बता दें कि यह जमीन क्लब को 1928 में लीज पर दी गई थी। अब सरकार लीज डीड के क्लॉज 4 का इस्तेमाल कर रही है, जो सरकार को सार्वजनिक उद्देश्य के लिए जमीन वापस लेने का अधिकार देता है।