Delhi: दिल्ली के आयुर्वेदिक डॉक्टर जस्मीत सिंह अरोड़ा पर्यावरण को बचाने के लिए एक अनोखा काम कर रहे हैं। उन्होंने ‘मैंगो गुठली मिशन’ के जरिए अब तक 8 लाख से ज्यादा आम के पौधे किसानों को बांटे हैं। लोग उन्हें &#
Delhi: दिल्ली के आयुर्वेदिक डॉक्टर जस्मीत सिंह अरोड़ा पर्यावरण को बचाने के लिए एक अनोखा काम कर रहे हैं। उन्होंने ‘मैंगो गुठली मिशन’ के जरिए अब तक 8 लाख से ज्यादा आम के पौधे किसानों को बांटे हैं। लोग उन्हें ‘गुठलीमैन’ के नाम से बुलाते हैं क्योंकि वे कूड़े में फेंकी जाने वाली आम की गुठलियों से नए पौधे तैयार करते हैं। उनकी यह पहल अब एक बड़े आंदोलन का रूप ले चुकी है जो हरियाली बढ़ाने और लोगों को जागरूक करने का काम कर रही है।
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कैसे तैयार होते हैं ये पौधे और कौन करता है मदद?
इस मुहिम के लिए गुठलियां जमा करने में स्कूल, आम लोग और सेना की टुकड़ियां भी मदद करती हैं। यहां तक कि विदेशों से भी लोग गुठलियां भेज रहे हैं। इन गुठलियों को पश्चिम बंगाल के डायमंड हार्बर और बर्धमान में ले जाया जाता है, जहां इन्हें नर्सरी में उगाया जाता है। जस्मीत सिंह अरोड़ा के साथ अशोक मोदी जैसे लोग भी जुड़े हैं जो इन पौधों को बड़ा करने और ग्राफ्टिंग करने के लिए जमीन और संसाधन उपलब्ध कराते हैं। साल 2026 तक इस मिशन ने 21 लाख से ज्यादा गुठलियां इकट्ठा करने का लक्ष्य हासिल किया है।
किसानों की आमदनी बढ़ाने और पर्यावरण पर क्या असर है?
यह मिशन किसानों को धान की पारंपरिक खेती छोड़कर आम के बाग लगाने के लिए प्रेरित करता है। इससे न केवल हरियाली बढ़ती है बल्कि किसानों को लंबे समय तक कमाई का जरिया भी मिलता है। किसानों को केमिकल के बिना खेती करने और ऑर्गेनिक खाद बनाने की ट्रेनिंग भी दी जा रही है। इसके अलावा उन्हें कार्बन क्रेडिट के जरिए भविष्य में अतिरिक्त पैसे कमाने के तरीके भी बताए जाते हैं। इसके कुछ मुख्य फायदे नीचे दिए गए हैं:
- कम लागत: ऑर्गेनिक खेती से खाद और कीटनाशकों का खर्च कम होता है।
- पर्यावरण सुरक्षा: आम के पेड़ कार्बन सोखने और ऑक्सीजन देने में सहायक हैं।
- बेहतर आय: फलों की बिक्री के साथ-साथ कार्बन क्रेडिट से भी कमाई संभव है।
- मिट्टी की सेहत: रासायनिक खाद न डालने से जमीन की उपजाऊ शक्ति बनी रहती है।
| विवरण |
आंकड़े |
| कुल वितरित पौधे |
8 लाख से अधिक |
| कुल जमा की गई गुठलियां |
21 लाख |
| मुहिम की शुरुआत |
साल 2019 |
| विदेशों से सहयोग |
न्यूजीलैंड, कनाडा, इटली |