Delhi के गुरुद्वारे में फिल्म ‘सतलुज’ की स्क्रीनिंग, 1984 के दौर की यादों से भावुक हुई नई पीढ़ी
Delhi: राजधानी के शास्त्री नगर इलाके में स्थित गुरुद्वारा दशमेश दरबार में शनिवार को फिल्म ‘सतलुज’ की स्क्रीनिंग की गई। इस फिल्म को देखने के बाद वहां मौजूद लोग भावुक हो गए और 1984 के दौर का पंजाब का दर्द एक बा
Delhi: राजधानी के शास्त्री नगर इलाके में स्थित गुरुद्वारा दशमेश दरबार में शनिवार को फिल्म ‘सतलुज’ की स्क्रीनिंग की गई। इस फिल्म को देखने के बाद वहां मौजूद लोग भावुक हो गए और 1984 के दौर का पंजाब का दर्द एक बार फिर ताजा हो गया। इस कार्यक्रम का मुख्य मकसद नई पीढ़ी को उस समय की परिस्थितियों और संघर्षों से रूबरू कराना था।
फिल्म ‘सतलुज’ का निर्देशन हनी त्रेहान ने किया है और इसमें मुख्य भूमिका दिलजीत दोसांझ ने निभाई है। यह फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और उनके कार्यों पर आधारित है। स्क्रीनिंग के दौरान गुरुद्वारा दशमेश दरबार के सचिव हरजीत सिंह ने कहा कि जसवंत सिंह खालड़ा का योगदान बहुत बड़ा था और हर किसी को अपने घर और दफ्तर में उनकी तस्वीर रखनी चाहिए।
इस बीच फिल्म को लेकर विवाद भी खड़ा हो गया है। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी (DSGMC) के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने नाराजगी जताई कि ZEE5 प्लेटफॉर्म ने फिल्म को रिलीज के 48 घंटे के भीतर हटा दिया। उन्होंने इसे जसवंत सिंह खालड़ा की कहानी को दबाने की कोशिश बताया और ZEE5 से फिल्म को तुरंत बहाल करने की मांग की। DSGMC ने अब इस फिल्म की और अधिक सार्वजनिक स्क्रीनिंग करने और खालड़ा के जीवन पर शैक्षिक सेमिनार आयोजित करने का फैसला किया है।
दूसरी तरफ, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि फिल्म ‘सतलुज’ को बिना जरूरी प्रमाणन (certification) के जारी किया गया था। जसवंत सिंह खालड़ा उन कार्यकर्ताओं में शामिल थे जिन्होंने 80 और 90 के दशक में पंजाब पुलिस द्वारा की गई कथित न्यायेतर हत्याओं और जबरन गुमशुदगियों के सबूत सामने लाए थे। 1995 में उनका अपहरण कर लिया गया था और उनकी हत्या कर दी गई थी।
ZEE5 से फिल्म हटने के बाद अब पंजाब, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और जम्मू जैसे राज्यों के गुरुद्वारों में इसकी सामुदायिक स्क्रीनिंग की जा रही है। जम्मू में 10 से 13 जुलाई तक और जयपुर में 11 जुलाई को स्क्रीनिंग रखी गई थी। फिल्म के चित्रण को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही हैं, जहां कुछ लोग इसे ऐतिहासिक सच्चाई मान रहे हैं, वहीं कुछ लोग इसे एक तरफा चित्रण बता रहे हैं।