Delhi: राजधानी दिल्ली की हवा में इन दिनों एक अजीब बदलाव देखा जा रहा है। जहां बारिश और तेज हवाओं की वजह से कुछ प्रदूषक कम हुए हैं और हवा ‘संतोषजनक’ श्रेणी में रही, वहीं अब ग्राउंड-लेवल ओजोन (O3) एक नए खतरे के
Delhi: राजधानी दिल्ली की हवा में इन दिनों एक अजीब बदलाव देखा जा रहा है। जहां बारिश और तेज हवाओं की वजह से कुछ प्रदूषक कम हुए हैं और हवा ‘संतोषजनक’ श्रेणी में रही, वहीं अब ग्राउंड-लेवल ओजोन (O3) एक नए खतरे के रूप में सामने आया है। यह गैस सीधे नहीं निकलती बल्कि धूप और अन्य गैसों के मिलने से बनती है, जो सेहत के लिए काफी नुकसानदेह है।
ओजोन प्रदूषण क्या है और यह कैसे बढ़ता है
ग्राउंड-लेवल ओजोन तब बनता है जब गाड़ियों और फैक्ट्रियों से निकलने वाली नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) और कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) जैसी गैसें तेज धूप के साथ रासायनिक प्रतिक्रिया करती हैं। मई के महीने में धूप तेज होने के कारण यह समस्या ज्यादा बढ़ जाती है। CPCB के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में ओजोन-प्रभावी दिनों की संख्या 2024 में 33 थी, जो 2025 में बढ़कर 76 हो गई।
किन इलाकों में है सबसे ज्यादा खतरा
दिल्ली-एनसीआर के कई इलाके इस प्रदूषण से बुरी तरह प्रभावित हैं। दक्षिण और उत्तर-पश्चिम दिल्ली के साथ-साथ नोएडा और गाजियाबाद में स्थिति गंभीर है। मुख्य हॉटस्पॉट की लिस्ट नीचे दी गई है:
- दिल्ली: नेहरू नगर, श्री अरबिंदो मार्ग, आनंद विहार, पटपड़गंज और मंदिर मार्ग।
- नोएडा: सेक्टर 62।
- गाजियाबाद: वसुंधरा और लोनी।
- गुरुग्राम: ग्वाल पहाड़ी (यहां रात में भी ओजोन का स्तर ऊंचा रहता है)।
सेहत पर क्या असर पड़ता है
विशेषज्ञों के अनुसार ओजोन एक ऑक्सीडेंट की तरह काम करता है, जो शरीर के अंदरूनी ऊतकों को नुकसान पहुंचाता है। इससे फेफड़ों में जलन, खांसी और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याएं होती हैं। बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा के मरीजों के लिए यह और भी खतरनाक है। लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने से फेफड़ों को स्थायी नुकसान हो सकता है और अस्पताल में भर्ती होने की नौबत आ सकती है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
दिल्ली में ओजोन का स्तर कब बढ़ता है
ओजोन का स्तर आमतौर पर गर्मियों में, खासकर मई के महीने में बढ़ता है क्योंकि तेज धूप की वजह से हवा में मौजूद प्रदूषकों के बीच रासायनिक प्रतिक्रिया तेज हो जाती है।
ओजोन प्रदूषण से किन लोगों को ज्यादा खतरा है
यह बच्चों, बुजुर्गों और उन लोगों के लिए ज्यादा खतरनाक है जिन्हें पहले से अस्थमा, क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस या सांस संबंधी बीमारियां हैं।