Delhi: दिल्ली के सरकारी स्कूलों में नया सेशन शुरू हुए एक महीना बीत चुका है, लेकिन हजारों बच्चे अब भी बिना कॉपी और किताबों के क्लास जा रहे हैं। करीब 90 हजार छात्रों को अब तक राइटिंग मटेरियल नहीं मिला है, जिससे उनकी पढ़ाई
Delhi: दिल्ली के सरकारी स्कूलों में नया सेशन शुरू हुए एक महीना बीत चुका है, लेकिन हजारों बच्चे अब भी बिना कॉपी और किताबों के क्लास जा रहे हैं। करीब 90 हजार छात्रों को अब तक राइटिंग मटेरियल नहीं मिला है, जिससे उनकी पढ़ाई पर बुरा असर पड़ रहा है। इस मामले को लेकर अब दिल्ली हाई कोर्ट में भी सुनवाई हुई है।
किन इलाकों में है ज्यादा किल्लत और क्या है वजह
रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली के कुल छात्रों में से लगभग 12.9% बच्चों के पास स्टेशनरी नहीं है। सबसे ज्यादा समस्या West B, West A और North-East I जिलों में देखी गई है। शिक्षा मंत्री Ashish Sood ने बताया कि किताबों की छपाई के लिए नई टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई थी ताकि खर्च में 20 से 30 प्रतिशत की कमी लाई जा सके, इसी वजह से वितरण में देरी हुई है।
हाई कोर्ट का हस्तक्षेप और सरकार का आश्वासन
NGO Social Jurist ने इस देरी को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की थी। इसके बाद दिल्ली सरकार ने कोर्ट को भरोसा दिलाया है कि कक्षा 1 से 8 तक के सभी छात्रों को मई के दूसरे हफ्ते (गर्मियों की छुट्टियों से पहले) तक किताबें मिल जाएंगी। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वितरण की निगरानी बढ़ा दी गई है और 6 मई तक लगभग सभी बच्चों तक सामान पहुँच जाएगा।
प्राइवेट स्कूलों के लिए मुख्यमंत्री की सख्त चेतावनी
मुख्यमंत्री Rekha Gupta ने प्राइवेट और सहायता प्राप्त स्कूलों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे अभिभावकों को किसी खास दुकान से यूनिफॉर्म, किताबें या स्टेशनरी खरीदने के लिए मजबूर न करें। स्कूलों को पारदर्शी लिस्ट देनी होगी और कई विकल्प देने होंगे। नियम तोड़ने वाले स्कूलों पर सख्त कार्रवाई होगी और जरूरत पड़ने पर सरकार उन्हें अपने कब्जे में भी ले सकती है। शिकायतों के लिए नोडल ऑफिसर के तौर पर डॉ. राजपाल सिंह को नियुक्त किया गया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
दिल्ली के कितने सरकारी स्कूल छात्रों को कॉपी-किताबें नहीं मिली हैं
लगभग 90,000 से ज्यादा छात्रों को अब तक राइटिंग मटेरियल नहीं मिला है, जो कुल नामांकन का करीब 12.9% है।
किताबों के वितरण में देरी का मुख्य कारण क्या है
शिक्षा मंत्री के अनुसार, छपाई के लिए नई टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई थी ताकि लागत में 20-30% की कटौती की जा सके, जिसकी वजह से देरी हुई।