Delhi के स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा के लिए सख्त नियम, आपराधिक रिकॉर्ड वाले स्टाफ को तुरंत हटाने का आदेश
Delhi: दिल्ली सरकार ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर बहुत बड़ा कदम उठाया है। शिक्षा निदेशालय (DoE) ने आदेश दिया है कि जिस भी स्टाफ सदस्य पर बच्चों के साथ दुर्व्यवहार, यौन अपराध या हिंसक अपराधों का आपराधिक रिकॉर्ड
Delhi: दिल्ली सरकार ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर बहुत बड़ा कदम उठाया है। शिक्षा निदेशालय (DoE) ने आदेश दिया है कि जिस भी स्टाफ सदस्य पर बच्चों के साथ दुर्व्यवहार, यौन अपराध या हिंसक अपराधों का आपराधिक रिकॉर्ड होगा, उसे तुरंत काम से हटा दिया जाएगा। यह फैसला POCSO एक्ट को सख्ती से लागू करने और बच्चों को सुरक्षित माहौल देने के लिए लिया गया है।
शिक्षा निदेशालय ने शुक्रवार को एक सर्कुलर जारी किया, जिसके तहत सभी सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं। अब स्कूलों को यह सुनिश्चित करना होगा कि बच्चों के संपर्क में आने वाला हर व्यक्ति, चाहे वह टीचर हो, गैर-शिक्षण स्टाफ हो या कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाला कर्मचारी, उसका बैकग्राउंड वेरिफिकेशन पूरा हो। सभी स्टाफ को एक हलफनामा (Affidavit) देना होगा कि उनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है।
सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए हर स्कूल में एक ‘चाइल्ड प्रोटेक्शन कमेटी’ बनाई जाएगी। इस कमेटी का मुखिया स्कूल का प्रिंसिपल होगा और इसमें पेरेंट्स, काउंसलर और छात्रों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। यह कमेटी हर तीन महीने में बैठक करेगी। साथ ही, स्कूलों में बच्चों को ‘गुड टच और बैड टच’, ऑनलाइन खतरों और साइबर बुलिंग जैसे विषयों पर जागरूक किया जाएगा।
नियमों में लापरवाही बरतने वाले स्कूल प्रमुखों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान है। अगर कोई स्कूल यौन अपराध की शिकायत को छिपाता है या तुरंत रिपोर्ट नहीं करता, तो स्कूल हेड को एक साल तक की जेल हो सकती है। इसके अलावा, स्कूल बसों के लिए भी कड़े नियम तय किए गए हैं। बसों का रंग पीला होना चाहिए, उनमें GPS और अग्निशमन यंत्र (Fire Extinguishers) लगे होने चाहिए। बस ड्राइवरों के पास कमर्शियल लाइसेंस और कम से कम 5 साल का अनुभव होना जरूरी है।
| मुख्य नियम | विवरण |
|---|---|
| स्टाफ वेरिफिकेशन | सभी कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन और हलफनामा अनिवार्य |
| रिपोर्टिंग | यौन अपराध की सूचना तुरंत अधिकारियों को देनी होगी |
| कमेटी | प्रिंसिपल की अध्यक्षता में चाइल्ड प्रोटेक्शन कमेटी का गठन |
| ट्रेनिंग | स्टाफ को POCSO और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की ट्रेनिंग दी जाएगी |
| बस सुरक्षा | GPS, पीला रंग और महिला अटेंडेंट का होना अनिवार्य |
| निरीक्षण | जुलाई 2026 से शिक्षा विभाग और पुलिस की संयुक्त टीमें जांच करेंगी |
उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने इन उपायों की समीक्षा की है। स्कूलों को 15 दिनों के भीतर अपनी अनुपालन रिपोर्ट और सुरक्षा चेकलिस्ट जिला अधिकारियों को जमा करनी होगी। जुलाई 2026 से शिक्षा विभाग और दिल्ली पुलिस की संयुक्त टीमें स्कूलों का निरीक्षण करेंगी ताकि यह देखा जा सके कि नियमों का पालन हो रहा है या नहीं।