Delhi: दिल्ली सरकार ने शहर के करीब 30 लाख निर्माण श्रमिकों और असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए एक बड़ी योजना शुरू की है। मुख्यमंत्री Rekha Gupta के नेतृत्व में अब मजदूरों के लिए ‘पासपोर्ट सेवा केंद्र’ की तरह
Delhi: दिल्ली सरकार ने शहर के करीब 30 लाख निर्माण श्रमिकों और असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए एक बड़ी योजना शुरू की है। मुख्यमंत्री Rekha Gupta के नेतृत्व में अब मजदूरों के लिए ‘पासपोर्ट सेवा केंद्र’ की तरह हाई-टेक ‘कर्मिक सेवा केंद्र’ (KSK) और मोबाइल यूनिट्स खोले जाएंगे। इस कदम से मजदूरों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए अब दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
कर्मिक सेवा केंद्र (KSK) में क्या होगा खास
इन केंद्रों को पूरी तरह आधुनिक बनाया जाएगा ताकि मजदूरों का काम जल्दी हो सके। इसमें AI तकनीक का इस्तेमाल होगा जिससे कागजी कार्रवाई कम होगी और इंतजार का समय घटेगा। यहाँ मजदूरों के रजिस्ट्रेशन से लेकर उनके मेडिकल चेकअप और वेलफेयर स्कीम की जानकारी एक ही जगह मिलेगी। इसके अलावा, केंद्रों पर सेल्फ-हेल्प कियोस्क भी लगाए जाएंगे ताकि लोग खुद अपनी जानकारी देख सकें।
कितने केंद्र खुलेंगे और कौन करेगा काम
दिल्ली सरकार और Delhi Building and Other Construction Workers Welfare Board (DBOCWWB) ने इसके लिए पूरी रूपरेखा तैयार कर ली है। योजना की मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:
| सुविधा का नाम |
कुल संख्या/विवरण |
| स्थायी (Static) KSK केंद्र |
13 केंद्र |
| मोबाइल KSK यूनिट्स |
13 यूनिट्स |
| लेबर चौक (Labour Chowks) |
39 (हर जिले में 3) |
| कुल लाभार्थी |
करीब 30 लाख मजदूर |
मजदूरों को कैसे मिलेगा फायदा
इन केंद्रों के जरिए मजदूरों का रजिस्ट्रेशन आसान होगा और उन्हें सीधे उनके खाते में पैसा (DBT) मिलने में मदद मिलेगी। सरकार ने यह फैसला इसलिए लिया क्योंकि मजदूरों को अपनी बुनियादी सुविधाओं और योजनाओं का लाभ लेने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। अब मोबाइल यूनिट्स के जरिए सुविधा उनके करीब पहुंचेगी, जिससे प्रवासी और स्थानीय दोनों तरह के मजदूरों को मदद मिलेगी।