Delhi के 44 पुराने फ्लाईओवर की होगी जांच, सरकार ने दिए 11 करोड़ रुपये, सफर होगा सुरक्षित
Delhi: दिल्ली के पुराने फ्लाईओवर पर सफर करने वालों के लिए एक बड़ी खबर है। सरकार ने शहर के 44 पुराने फ्लाईओवरों की मजबूती जांचने के लिए स्ट्रक्चरल ऑडिट का फैसला किया है। इसके लिए 11 करोड़ रुपये का बजट भी मंजूर कर दिया गया
Delhi: दिल्ली के पुराने फ्लाईओवर पर सफर करने वालों के लिए एक बड़ी खबर है। सरकार ने शहर के 44 पुराने फ्लाईओवरों की मजबूती जांचने के लिए स्ट्रक्चरल ऑडिट का फैसला किया है। इसके लिए 11 करोड़ रुपये का बजट भी मंजूर कर दिया गया है ताकि समय रहते मरम्मत का काम किया जा सके और किसी भी बड़े हादसे को रोका जा सके।
PWD मिनिस्टर परवेश वर्मा ने बताया कि यह कदम लोगों की सुरक्षा के लिए उठाया गया है। उन्होंने साफ कहा कि पब्लिक सेफ्टी के मामले में किसी संकट का इंतजार नहीं किया जा सकता। यह ऑडिट उन फ्लाईओवरों का होगा जो 15 साल से ज्यादा पुराने हैं। इनमें से कई फ्लाईओवर 1982 से 2010 के बीच बने थे। यह पूरी प्रक्रिया अगले तीन सालों में अलग-अलग चरणों में पूरी की जाएगी, जिसमें हर साल करीब सात से आठ फ्लाईओवरों की मरम्मत और सुधार का काम होगा।
इस काम के लिए एक्सपर्ट कंसल्टेंट्स की मदद ली जाएगी, जिनकी नियुक्ति 2026-27 के वित्तीय वर्ष में होगी। यह पूरा प्रोसेस सरकारी नियमों और CVC की गाइडलाइन्स के तहत पारदर्शी तरीके से किया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि यह सिर्फ एक रूटीन जांच नहीं है, बल्कि एक ऐसी कोशिश है जिससे यह पता चल सके कि कौन सा पुल कमजोर हो रहा है और उसे कब ठीक करने की जरूरत है।
जांच के दायरे में आने वाले कुछ प्रमुख फ्लाईओवर की लिस्ट नीचे दी गई है:
| फ्लाईओवर का नाम | निर्माण वर्ष |
|---|---|
| I.P. Estate (Ring Road Intersection) | 1982 |
| RUB Nagia Park-Shakti Nagar | 1990 |
| Sarai Kale Khan Flyover | 2003 |
| Safdarjung (AIIMS) Flyover | 2003 |
| Lajpat Nagar-Srinivaspuri Flyover | 2006 |
| DND Flyover | 2008 |
| Mangolpuri Flyover | 2008 |
| Africa Avenue-Aruna Asaf Ali Marg | 2009 |
| Naraina Flyover | 2010 |
| Ghazipur Flyover | 2010 |
| Azadpur Grade Separator | 2010 |
PWD मिनिस्टर ने इस पहल को दिल्ली के नागरिकों के भरोसे और सुविधा में एक निवेश बताया है। शहर की कोर्ट के निर्देशों के बाद भी यह फैसला लिया गया है। विभाग को उम्मीद है कि ऑडिट के बाद ज्यादातर फ्लाईओवरों में किसी न किसी स्तर पर मरम्मत की जरूरत सामने आएगी, जिसे समय रहते पूरा कर लिया जाएगा।