Delhi में जेलों की भीड़ कम करेगी सरकार, 48 शहरी गांवों में जमीन की तलाश शुरू
Delhi: राजधानी की तिहाड़ और रोहिणी जैसी जेलों में कैदियों की बढ़ती संख्या को कम करने के लिए दिल्ली सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार अब शहर के 48 हालिया ‘शहरी गांवों’ (urban villages) में ऐसी जमीन तलाश रही
Delhi: राजधानी की तिहाड़ और रोहिणी जैसी जेलों में कैदियों की बढ़ती संख्या को कम करने के लिए दिल्ली सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार अब शहर के 48 हालिया ‘शहरी गांवों’ (urban villages) में ऐसी जमीन तलाश रही है जहां नई जेल बनाई जा सके या मौजूदा जेलों का विस्तार किया जा सके।
दिल्ली की तीन जेल परिसरों में इस समय लगभग 19,500 कैदी बंद हैं, जबकि उनकी क्षमता केवल 10,026 है। यानी जेलें अपनी क्षमता से लगभग दोगुनी भरी हुई हैं। दिसंबर 2024 के आंकड़ों के मुताबिक, देश में जेलों में कैदियों की सबसे ज्यादा भीड़ दिल्ली में ही थी। इस दबाव की वजह से पानी की सप्लाई, सीवरेज, कचरा प्रबंधन और स्वास्थ्य सुविधाओं पर बुरा असर पड़ रहा है।
इस समस्या को सुलझाने के लिए जेल महानिदेशक (DG Prisons) के कार्यालय ने पांच कमेटियां बनाई हैं। हर कमेटी में चार सदस्य होंगे जो इन 48 गांवों का सर्वे करेंगे। इन कमेटियों का काम खाली जमीन की पहचान करना और विस्तार के लिए सही जगह चुनकर अपनी रिपोर्ट सौंपना है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 25 मार्च 2025 को बजट पेश करते समय तिहाड़ जेल को वर्तमान जगह से शिफ्ट करने की बात कही थी। उन्होंने कैदियों के सुधार और पुनर्वास के लिए एक अलग सोसाइटी बनाने का प्रस्ताव भी रखा था। जेल विभाग ने अप्रैल 2025 में DDA से नई जेल परिसर के लिए 400 एकड़ जमीन की मांग की थी।
इन गांवों को ‘शहरी’ दर्जा मिलने से अब यहां जमीन का इस्तेमाल घर, दुकान या सरकारी इमारतों के लिए हो सकेगा। इससे पहले फरवरी 2026 में DDA ने और फिर मई 2026 में MCD की स्थायी समिति ने इन गांवों को शहरी घोषित करने की मंजूरी दी थी। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि 500 एकड़ तक की जमीन ढूंढना और वहां निर्माण कार्य पूरा करना एक बड़ी चुनौती होगी जिसमें काफी समय लगेगा।