Delhi: दिल्ली सरकार शहर के सरकारी स्कूलों की हालत सुधारने के लिए एक बड़ा कदम उठा रही है। अब स्कूलों की मरम्मत और सुरक्षा के लिए ड्रोन और AI जैसी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इस पहल का मकसद स्कूलों की हर एक दीवार,
Delhi: दिल्ली सरकार शहर के सरकारी स्कूलों की हालत सुधारने के लिए एक बड़ा कदम उठा रही है। अब स्कूलों की मरम्मत और सुरक्षा के लिए ड्रोन और AI जैसी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इस पहल का मकसद स्कूलों की हर एक दीवार, कमरे और सुविधा का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना है ताकि बच्चों को सुरक्षित माहौल मिल सके।
इस हेल्थ चेक में क्या-क्या जांचा जाएगा
इस प्रोजेक्ट के तहत स्कूलों के गलियारों, क्लासरूम और लैब की ड्रोन से मैपिंग की जा रही है। 360-डिग्री इमेजिंग के जरिए हर कमरे का डिजिटल प्रोफाइल बनाया जा रहा है। इसमें सिर्फ यह नहीं देखा जाएगा कि सुविधा मौजूद है या नहीं, बल्कि यह भी जांचा जाएगा कि वह काम कर रही है या नहीं। जैसे टूटे हुए नल, उखड़ता हुआ पेंट और खराब फायर एक्सटिंग्विशर की पहचान की जाएगी।
359 स्कूलों की हालत मिली खराब, छात्र शिफ्ट
अब तक की जांच में 359 सरकारी स्कूलों की बिल्डिंग खतरनाक पाई गई है। इन स्कूलों में पीने के पानी के नलों की कमी और दिव्यांग बच्चों के लिए टॉयलेट न होने जैसी बड़ी खामियां सामने आई हैं। सुरक्षा को देखते हुए इन स्कूलों के छात्रों को फिलहाल दूसरे कैंपस में शिफ्ट कर दिया गया है। शिक्षा मंत्री Ashish Sood ने बताया कि अगले ढाई महीने में सभी स्कूलों का ऑडिट पूरा हो जाएगा, जिसके बाद मरम्मत का काम शुरू होगा।
जांच के लिए किन तकनीकों और संस्थाओं की मदद ली जा रही है
सरकार ने इस काम के लिए IIT और NIT जैसे बड़े संस्थानों की मदद ली है, जो कमजोर बिल्डिंग्स की रिपोर्ट को वेरिफाई करेंगे। सुरक्षा मानकों के लिए CBSE और NDMA के नियमों का पालन किया जा रहा है। डेटा को एक सुरक्षित वेब एप्लीकेशन पर अपलोड किया जा रहा है, जिससे अधिकारी रीयल-टाइम में निगरानी कर सकेंगे। कुल 799 बिल्डिंग्स में चल रहे 1,086 स्कूलों का डिजिटल प्रोफाइल तैयार किया जाएगा।
Frequently Asked Questions (FAQs)
दिल्ली के कितने स्कूलों की बिल्डिंग खतरनाक पाई गई है
डिजिटल प्रोफाइलिंग के दौरान 359 सरकारी स्कूलों की बिल्डिंग खतरनाक पाई गई है, जहाँ बुनियादी सुविधाओं की कमी मिली है और छात्रों को दूसरे स्कूलों में शिफ्ट किया गया है।
स्कूलों की जांच के लिए कौन सी तकनीक इस्तेमाल हो रही है
जांच के लिए ड्रोन मैपिंग, 360-डिग्री इमेजिंग, AI-आधारित विश्लेषण और स्ट्रक्चरल सेफ्टी के लिए अल्ट्रासोनिक पल्स जैसे नॉन-डिस्ट्रक्टिव टेस्ट का इस्तेमाल किया जा रहा है।