Delhi में 300 बड़े प्रोजेक्ट्स की जांच, 70% में मिली गड़बड़ी; प्रॉपर्टी मालिकों को मिल सकते हैं रिकवरी नोटिस

Delhi: दिल्ली में बड़े निर्माण प्रोजेक्ट्स को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। एक शुरुआती जांच में पता चला है कि करीब 300 बड़े प्रोजेक्ट्स में से 70 प्रतिशत ने जरूरी चार्ज दिए बिना ही बिल्डिंग प्लान की मंजूरी ले ली थी।

Delhi: दिल्ली में बड़े निर्माण प्रोजेक्ट्स को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। एक शुरुआती जांच में पता चला है कि करीब 300 बड़े प्रोजेक्ट्स में से 70 प्रतिशत ने जरूरी चार्ज दिए बिना ही बिल्डिंग प्लान की मंजूरी ले ली थी। अब सरकार इन प्रॉपर्टी मालिकों को रिकवरी नोटिस भेज सकती है और बकाया पैसा न चुकाने पर प्रॉपर्टी सील करने की कार्रवाई भी हो सकती है।

दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के मंत्री परवेश वर्मा ने पिछले पांच सालों में पास हुए रेजिडेंशियल, कमर्शियल और ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट्स की जांच के आदेश दिए हैं। आरोप है कि इन प्रोजेक्ट्स ने इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट चार्ज (IFC) नहीं भरा, जिससे सरकार को हजारों करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है। अधिकारियों को शक है कि कुछ लोगों ने असली NOC के बजाय दिल्ली जल बोर्ड के लेटरहेड का इस्तेमाल करके MCD से मंजूरी हासिल की। इस पूरे मामले में रिटायर होने वाले DJB इंजीनियरों और MCD स्टाफ की मिलीभगत की भी आशंका जताई जा रही है।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सरकार ने जून 2026 से अवैध निर्माण और नियमों के उल्लंघन पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई है। इसी के तहत शहर में बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ और सीलिंग अभियान चलाए जा रहे हैं। जिन अधिकारियों ने लापरवाही बरती या मिलीभगत की, उन पर भी कानूनी कार्रवाई होगी।

बिल्डिंग प्लान की मंजूरी के लिए कुछ जरूरी नियम और शुल्क इस प्रकार हैं:

विवरण नियम/शुल्क
अनिवार्य शुल्क प्लान सबमिशन फीस, रीवैलिडेशन फीस, स्टैकिंग चार्ज और बिल्डिंग टैक्स
अन्य शुल्क मलबा हटाने के लिए सिक्योरिटी डिपॉजिट और अतिरिक्त FAR पर लेवी
नया रिफॉर्म (मार्च 2026) 25% शुल्क देकर प्रोविजनल NOC की सुविधा
नया नियम (मई 2026) चार्ज अब पूरे प्लॉट के बजाय पानी की मांग के आधार पर तय होंगे
छूट (Concessions) E, F श्रेणी की कॉलोनियों में 50% और G, H श्रेणी में 70% की छूट

नए नियमों के मुताबिक, 200 वर्ग मीटर से बड़े प्लॉट पर नए निर्माण के लिए ये चार्ज लागू होंगे, लेकिन ओपन एरिया और नॉन-FAR एरिया को गणना से बाहर रखा गया है।